मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सीधी धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले किसी भी जहाज पर हमला किया, तो अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाएगा.
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि होर्मुज में किसी भी वाणिज्यिक या सैन्य जहाज पर ईरान की ओर से हमला किए जाने पर अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा कि हमले में किसी भी तरह के हथियार का इस्तेमाल किया गया हो, अमेरिका उसका जवाब देगा.
ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, 'अब से जब भी ईरान इस्लामिक रिपब्लिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य उपकरण या हथियार से हमला करेगा, अमेरिका एक पुल या पावर प्लांट को बम से उड़ाकर तबाह कर देगा.'
उन्होंने यह भी कहा कि इन ठिकानों में राजधानी तेहरान के अंदर या उसके आसपास स्थित पुल और पावर प्लांट भी शामिल होंगे. ट्रंप की इस चेतावनी के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है.
ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है. अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ लगातार 11वीं रात सैन्य अभियान चलाया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, मंगलवार देर रात हुए ताजा हमले करीब 75 मिनट तक चले.
ईरान की सैन्य क्षमता से जुड़े ठिकानों पर हमला
CENTCOM ने बताया कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान की सैन्य गतिविधियों से जुड़े ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमता से जुड़े ठिकाने, विमान हैंगर, ड्रोन भंडारण केंद्र और सैन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया. अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है.
अमेरिका ने ईरान पर पिछले तीन महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 30 से ज्यादा वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाया है. ट्रंप इससे पहले पिछले सप्ताह भी चेतावनी दे चुके हैं कि अमेरिका अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर पुलों और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों तक कर सकता है.
28 फरवरी से जारी है संघर्ष
बता दें कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए. इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और उन खाड़ी देशों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं. इसके बाद संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल गया.
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के साथ लेबनान में इजरायली हमलों ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं.
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