ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा क्षेत्रीय युद्ध की चेतावनी दिए जाने के बावजूद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पीछे हटते नजर नहीं आ रहे हैं. बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने कहा कि उन्हें अब भी तेहरान के साथ समझौते की उम्मीद हैं और सभी विकल्प खुले रखे गए हैं.
फ्लोरिडा में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने खामेनेई की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में इस तरह की बयानबाज़ी स्वाभाविक है. उन्होंने कहा, “वह ऐसा क्यों नहीं कहेंगे? ऐसे तनावपूर्ण माहौल में यही अपेक्षित है.”
ट्रंप ने दोहराया कि उनकी सरकार की प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन अगर समझौता नहीं होता तो आगे के हालात खुद सच्चाई सामने ला देंगे. ट्रंप ने कहा, “उम्मीद है हम कोई डील करेंगे. अगर नहीं हुई, तो फिर देखेंगे कि वह सही थे या नहीं,”
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान पिछले कई हफ्तों से भीषण आंतरिक संकट से जूझ रहा है. दिसंबर के अंत में आर्थिक बदहाली और जीवनयापन की समस्याओं से शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन धीरे-धीरे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती में बदल गए. सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई में हजारों लोगों के मारे जाने और गिरफ्तार होने की खबरें सामने आई हैं.
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इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी, जबकि ट्रंप प्रशासन लगातार चेतावनी देता रहा कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते से इनकार किया या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा नहीं रोकी, तो हस्तक्षेप संभव है.
खामेनेई की चेतावनी से बढ़ा तनाव
खामेनेई ने रविवार को कहा कि किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब क्षेत्रीय युद्ध में बदलेगा. उन्होंने ईरान में चल रहे प्रदर्शनों को अमेरिका और इज़राइल समर्थित “साजिश” बताया और कहा कि ईरानी जनता धमकियों से डरने वाली नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि ईरान किसी देश पर हमला शुरू नहीं करना चाहता, लेकिन आक्रामकता का कड़ा जवाब दिया जाएगा.
दोनों देशों के रुख फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत को लेकर गंभीर है और परमाणु हथियारों के बिना एक स्वीकार्य समझौते की संभावना बनी हुई है. वहीं ईरान ने कहा है कि वह “न्यायसंगत” वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अपनी रक्षात्मक क्षमताओं पर किसी तरह की पाबंदी स्वीकार नहीं करेगा.
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