सूडान के अल-फशीर में पैरामिलिट्री फोर्स का हमला, 60 से अधिक लोगों की मौत

अल-फशीर में RSF ने सेना के डारफुर क्षेत्र में अंतिम गढ़ पर कब्जा करने के प्रयास में शहर को घेर रखा है. इस घेराबंदी ने भूख और रोग फैलाने का काम किया है. लगातार ड्रोन और तोपखाना हमले शरणस्थल, मस्जिदों, अस्पतालों और क्लीनिकों को निशाना बना रहे हैं.

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स्थानीय निवासियों द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में हमले के बाद के दृश्य दिखाई दिए. (Photo: Unicef/File) स्थानीय निवासियों द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में हमले के बाद के दृश्य दिखाई दिए. (Photo: Unicef/File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अक्टूबर 2025,
  • अपडेटेड 2:36 AM IST

सूडान के अल-फशीर शहर में शुक्रवार रात और शनिवार सुबह (स्थानीय समयानुसार) पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के ड्रोन और तोपखाने से हमलों में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई. हमले का निशाना एक शरणस्थल बना, जहां नागरिक सुरक्षित रहने आए थे.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय निवासियों द्वारा पोस्ट किए गए एक वीडियो में हमले के बाद के दृश्य दिखाई दिए. वीडियो में इमारत का भारी नुकसान और चारों ओर जली हुई फर्नीचर के टुकड़े बिखरे हुए दिख रहे हैं. 

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समाचार एजेंसी ने स्वतंत्र रूप से वीडियो की लोकेशन की पुष्टि की. इमारतों की स्थिति, छत की आकृति, फुटपाथ, पेड़ और चारदीवारी की पहचान उपग्रह छवियों और फाइल इमेजरी से की गई. हालांकि, वीडियो की सटीक डेट स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ता समूहों की रिपोर्ट और अन्य पुष्टि के माध्यम से हमले की जानकारी की पुष्टि हुई.

बता दें कि अल-फशीर में RSF ने सेना के डारफुर क्षेत्र में अंतिम गढ़ पर कब्जा करने के प्रयास में शहर को घेर रखा है. इस घेराबंदी ने भूख और रोग फैलाने का काम किया है. लगातार ड्रोन और तोपखाना हमले शरणस्थल, मस्जिदों, अस्पतालों और क्लीनिकों को निशाना बना रहे हैं.

अल-फशीर रेजिस्टेंस कमेटी ने बयान में कहा, “मलबे के नीचे शव दबे हुए हैं और अन्य लोग शरणस्थल में जलकर मारे गए, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं. यह निर्दयता से किया गया नरसंहार है. शरणस्थल पर दो बार ड्रोन हमला और आठ बार तोपखाने से गोलाबारी हुई."

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स्थानीय निवासियों ने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने अपने घरों और मोहल्लों में सुरक्षा के लिए बंकर बना लिए हैं. कार्यकर्ता समूह का कहना है कि इन हमलों में सैकड़ों नागरिकों की मौत हो चुकी है. शहर में रोजाना औसतन 30 लोग हिंसा, भूख और बीमारी के कारण मर रहे हैं.

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