मिडिल ईस्ट की जंग में रूस की एंट्री... अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की पुतिन ने की पेशकश, तनाव कम करने पर फोकस

मिडिल ईस्ट की जंग में इस्लामाबाद की बातचीत विफल होने के बाद तेजी से घटनाक्रम बदल रहा है. एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से धमकियों का सिलसिला रुक नहीं रहा है. वहीं दूसरी ओर दुनियाभर के मुल्क शांति के प्रयासों को तेज कर रहे हैं. पुतिन ने भी ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्था कराने की पेशकश की है.

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लादिमीर पुतिन ने ईरान राष्ट्रपति को फोन कर कहा - शांति में निभाएंगे भूमिका (Photo: AP) लादिमीर पुतिन ने ईरान राष्ट्रपति को फोन कर कहा - शांति में निभाएंगे भूमिका (Photo: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:47 PM IST

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ जंग अभी नाजुक हालातों से गुजर रहा है. दो सप्ताह का सीजफायर तो हो गया है. लेकिन, इसे टिकाऊ बनाने को लेकर जो पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में बैठक हुई वह सफल नहीं रही. अमेरिका और ईरान 1979 के बाद पहली बार एक मेज पर साथ आकर मतभेदों को सुलह करने के लिए बैठे थे. लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. इन सब के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्था की पेशकश की है. 

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रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से फोन पर बात की. इस बातचीत में पुतिन ने साफ कहा कि रूस इस पूरे इलाके में शांति स्थापित करने के प्रयासों में मदद करने के लिए तैयार है.

क्रेमलिन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, रूस चाहता है कि बातचीत के जरिए इस संकट का समाधान निकले और पूरे क्षेत्र में स्थिरता आए.

दूसरी तरफ, ईरान की ओर से अमेरिका को लेकर भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है. ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि अमेरिका अब तक तेहरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल की शांति वार्ताओं के बावजूद दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी बना हुआ है, जो किसी भी समझौते में बड़ी बाधा बन सकता है.

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रूस की इस पहल को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि वह खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है जो दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ा सकता है. रूस और ईरान के रिश्ते अच्छे हैं. और हाल में ही यूक्रेन-रूस में डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्था की पेशकश की थी. इसे लेकर पुतिन और ट्रंप अलास्का में मुलाकात भी की थी.

इन सब के बीच इजरायल को भी इस जंग में काफी पैसे बहाने पड़े हैं. इजरायल ने बताया है कि इस जंग की वजह से डिफेंस बजट में 11.5 अरब डॉलर का खर्च बढ़ा है.

इनपुट: AFP

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