कटा पैर, बहता रहा खून... जंग के मैदान से 2 दिन बाद ड्रोन ने बचाई यूक्रेनी सैनिक की जान

यूक्रेन की सेना ने युद्ध क्षेत्र में घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने के लिए स्टारगेट नामक हवाई बचाव ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है. इस ड्रोन की मदद से पहली बार रूसी सीमा के पास दो गंभीर रूप से घायल सैनिकों को जंग के मैदान से सुरक्षित निकाला गया.

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बचाए गए सैनिकों में एक 24 साल का जवान भी शामिल है. (सांकेतित तस्वीर) बचाए गए सैनिकों में एक 24 साल का जवान भी शामिल है. (सांकेतित तस्वीर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

यूक्रेन की सेना ने जंग के मैदान में घायल सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए खास हवाई बचाव ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है. सेना की एक विशेष इकाई ने सोमवार को बताया कि इस ड्रोन की मदद से पहली बार दो घायल सैनिकों को रूसी सीमा के पास जंग के मैदान से सुरक्षित निकाला गया. 

475वीं सेपरेट अलॉस्ट रेजिमेंट के मुताबिक, पिछले हफ्ते दो अलग-अलग अभियानों में स्टारगेट नामक नए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया. इस ड्रोन में एक खास बंद कैप्सूल लगा है, जिसमें घायल सैनिक को सुरक्षित ले जाया जा सकता है. 

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बचाए गए सैनिकों में एक 24 साल का जवान भी शामिल है. वह पहली टेरिटोरियल डिफेंस ब्रिगेड में तैनात है. उसने बताया कि उसे सुरक्षित निकाले जाने के लिए दो दिनों तक इंतजार करना पड़ा. वह इतनी बुरी तरह से घायल था कि जंग के मैदान से 20 किलोमीटर पैदल चलकर बाहर निकलना भी उसके लिए बहुत मुश्किल हो रहा था. 

उसने बताया कि चोट के कारण उसके पैर का आधा हिस्सा कट गया था और काफी खून बह चुका था. उसने साफ कहा कि अगर वह छोटा ड्रोन वहां नहीं आता तो उसका बचना नामुमकिन था. ड्रोन में नारंगी और काले रंग का सिगार के आकार जैसा स्ट्रेचर लगा था. यह एक ऐसे मैदान में उतरा, जहां लंबी घास में फाइबर-ऑप्टिक केबल उलझी हुई थी. 

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बचाए गए जवान और उसके साथी सैनिकों को डर था कि कहीं ड्रोन इन केबलों में फंस न जाए. हालांकि ड्रोन ने घायल सैनिक को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और उसे इस पूरी उड़ान में 15 मिनट से भी कम समय लगा. 

475वीं रेजिमेंट को कोड 9.2 के नाम से भी जाना जाता है. रेजिमेंट ने बताया कि जंग के मैदान में इस्तेमाल करने से पहले कई हफ्तों तक स्टारगेट ड्रोन का परीक्षण किया गया था. 

रेजिमेंट के मुताबिक, ड्रोन की मदद से बचाए गए दोनों सैनिकों के हाथ-पैरों में गंभीर चोटें आई थीं. वे ग्रे जोन में फंसे हुए थे. यह इलाका रूस की सीमा से करीब 5 किलोमीटर दूर है. 

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