'अंतरराष्ट्रीय कानून अब खत्म...', ईरान-US जंग से भड़का रूस, बुलाई P-5 देशों की बैठक

ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों से बिगड़े हालात के बीच रूस ने बड़ा बयान दिया है. रूस ने अंतरराष्ट्रीय कानून के वजूद पर सवाल उठाते हुए, सुरक्षा संकट पर चर्चा के लिए पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव को फिर से सामने रखा है जिसमें P-5 देशों की बैठक बुलाने की बात कही गई थी.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ (फाइल फोटो) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के साथ (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 8:48 PM IST

पश्चिमी एशिया के हालात इस वक्त बेहद तनावपूर्ण हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर जो हमले हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच रूस ने एक बहुत बड़ा और कड़ा बयान दिया है. रूस का कहना है कि जिस 'अंतरराष्ट्रीय कानून' की हम बात करते हैं, वह अब लगभग खत्म हो चुका है. इसी बिगड़ते माहौल को देखते हुए रूस ने अब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस पुराने प्रस्ताव को फिर से सबके सामने रखा है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों (P-5) की बैठक बुलाने की सलाह दी गई थी.

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सिर्फ कागजों पर रह गया है कानून

रूस के सरकारी टीवी 'रूसिया' को दिए एक इंटरव्यू में क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने बहुत खरी-खरी बात कही. उन्होंने कहा कि आज के दौर में हमने वह सब कुछ खो दिया है जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून कहा जाता था. पेसकोव ने सवाल उठाया कि जब कानून का कोई वजूद ही नहीं बचा, तो भला किसी से इसके नियमों और सिद्धांतों को मानने के लिए कैसे कहा जा सकता है?

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उन्होंने इस स्थिति को समझाने के लिए दो शब्दों का इस्तेमाल किया,'De Jure' और 'De Facto'. उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय कानून 'कानून के मुताबिक' De Jure तो किताबों या कागजों में दिख सकता है, लेकिन वास्तविक रूप से De Facto यानी जमीनी हकीकत में इसका अब कोई नामोनिशान नहीं रह गया है.

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पुतिन के पुराने प्रस्ताव पर जोर

पेसकोव ने जोर देकर कहा कि आज दुनिया में कोई भी यह साफ-साफ नहीं बता सकता कि अंतरराष्ट्रीय कानून आखिर है क्या? ऐसे में किसी को इसके पालन के लिए कहना बेमानी है. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से पहले पुतिन ने एक प्रस्ताव दिया था कि दुनिया की पांच बड़ी ताकतें (रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन)  एक साथ बैठें और वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा करें. आज के हालात को देखते हुए इस प्रस्ताव पर फिर से गौर करना बहुत जरूरी हो गया है.

अस्थिरता और आर्थिक संकट का खतरा

ईरान पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए पेसकोव ने चेतावनी दी कि इस क्षेत्र में स्थिति अब काफी हद तक हाथ से निकल रही है. लगातार बढ़ते क्षेत्रीय संघर्षों और अनसुलझे मुद्दों का जो मिला-जुला असर पड़ रहा है, वह सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा. इसके बहुत बड़े आर्थिक और राजनीतिक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं.

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अमेरिका से जवाब की मांग

इस पूरे मामले पर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका को घेरे में लिया. लावरोव ने कहा कि अमेरिका को अपनी उन बड़ी योजनाओं को दुनिया के सामने साफ करना चाहिए, जिनकी वजह से ऐसे हालात बन रहे हैं. उन्होंने मांग की कि अमेरिका बताए कि उसकी ये योजनाएं पुराने अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानदंडों से कैसे मेल खाती हैं. उन्होंने साफ किया कि अब वह समय आ गया है जब हमें यह परिभाषित करना होगा कि हम किस तरह की दुनिया में रह रहे हैं.
 

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