रूस के सुदूर पूर्वी अमूर इलाके में मंगलवार को एक सैन्य विमान उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद हादसे का शिकार हो गया. रूसी समाचार एजेंसी इंटरफैक्स ने रक्षा मंत्रालय के हवाले से बताया कि इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के मुताबिक विमान टुपोलेव Tu-154 था और उसमें सात लोग सवार थे. हादसे की वजह अभी साफ नहीं है और जांच की जाएगी.
हादसा अमूर क्षेत्र के क्रास्नोयारोवो गांव के पास हुआ. सवार सात लोगों में से छह की जान चली गई. मरने वालों में दो लोग ऐसे थे जिन्होंने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में चोटों की वजह से दम तोड़ दिया. टक्कर के बाद विमान के ईंधन टैंकों में धमाका हुआ और मलबे में आग लग गई.
Tu-154 सोवियत दौर का तीन इंजन वाला जेट विमान है. इसे शुरू में मध्यम दूरी के यात्री विमान के तौर पर बनाया गया था. इसने पहली उड़ान 1968 में भरी थी और 1970 के दशक की शुरुआत में यह यात्रियों के लिए चलने लगा. बाद में सेना और सरकार भी इसे परिवहन और खास मिशनों में इस्तेमाल करने लगी.
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सोवियत संघ में यह सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले यात्री विमानों में गिना जाता था, खासकर देश के भीतर की उड़ानों में. इसके एक हजार से ज्यादा विमान बने. तीन इंजन, मजबूत लैंडिंग गियर और कम सुविधा वाले हवाई अड्डों से उड़ान भरने की क्षमता की वजह से यह रूस के विशाल इलाके में काम आता था.
अब इस विमान का व्यावसायिक इस्तेमाल लगभग खत्म हो चुका है. फिर भी कुछ Tu-154 सरकारी और सैन्य कामों में लगे हैं. रूस का रक्षा मंत्रालय और दूसरी सरकारी एजेंसियां कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए इसके अलग अलग संस्करण चलाती हैं. बदलाव किए गए कुछ विमान खास मिशनों में भी काम आते हैं. रूसी सेना की 223वीं फ्लाइट स्क्वाड्रन भी परिवहन मिशनों के लिए Tu-154 उड़ाती रही है.
इस विमान का इतिहास कई बड़े सैन्य हादसों से भी जुड़ा है. दिसंबर 2016 में रूसी रक्षा मंत्रालय का एक Tu-154 सोची से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद काला सागर में गिर गया था. उसमें सवार सभी 92 लोग मारे गए थे. विमान में सैन्यकर्मी, पत्रकार और अलेक्जेंड्रोव एन्सेंबल के सदस्य थे, जो सीरिया जा रहे थे.
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