पाकिस्तान ने निकाली PoK प्रोटेस्ट दिखाने की खुन्नस, पत्रकार को आतंकी लिस्ट में डाला

पाक सरकार ने जर्नलिस्ट पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद को फोर्थ शेड्यूल यानी आतंकवाद निगरानी सूची में शामिल कर दिया है. दानिश इरशाद POK में रिपोर्टिंग करते हैं. पिछले कई सालों से क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक मुद्दों को कवर कर रहे हैं. इस कार्रवाई को बिना कोर्ट के आदेश के किया गया है, जिसपर सवाल उठ रहे हैं.

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दानिश इरशाद एक पत्रकार और रिसर्चर हैं, जिन्होंने लगभग एक दशक तक PoK और वहां की राजनीति को कवर किया है. (फोटो-X/Irshad Danish) दानिश इरशाद एक पत्रकार और रिसर्चर हैं, जिन्होंने लगभग एक दशक तक PoK और वहां की राजनीति को कवर किया है. (फोटो-X/Irshad Danish)

aajtak.in

  • इस्लामाबाद,
  • 22 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:41 PM IST

पाकिस्तान ने पत्रकार और रिसर्चर दानिश इरशाद को आतंकवाद की निगरानी सूची में डाल दिया है. उन्हें पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर यानी POK में रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है. इरशाद करीब एक दशक से इस क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक मुद्दों को कवर कर रहे हैं.

दरअसल, इरशाद लाहौर स्थित न्यूओ न्यूज से जुड़े हैं. वह जम्मू के कश्मीर टाइम्स में कॉलम भी लिखते हैं. उन्होंने POK में हाल के विरोध प्रदर्शनों पर लगातार रिपोर्टिंग की थी. उन्होंने सुरक्षा बलों की कार्रवाई से प्रभावित परिवारों से भी बातचीत की थी.

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अब उनका नाम पाकिस्तान की फोर्थ शेड्यूल लिस्ट में डाल दिया गया है. यह कार्रवाई 29 जुलाई को कथित तौर पर POK के गृह विभाग के आदेश से हुई. इस सूची में ऐसे लोगों को रखा जाता है, जिन पर आतंकवादी संगठनों से संबंध होने का शक जताया जाता है.

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कश्मीर टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इरशाद का नाम 24 लोगों की लिस्ट में 12वें नंबर पर है. आदेश में जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट आवामी एक्शन कॉमिटी यानी JAAC से जुड़े लोगों का उल्लेख किया है. हालांकि इरशाद के खिलाफ किसी खास घटना या अपराध का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है. उनके खिलाफ किसी अदालत में मुकदमा चलने या दोष साबित होने की भी जानकारी नहीं है.

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इरशाद ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा कि किसी पत्रकार के बोलने और लिखने को आतंकवाद कैसे माना जा सकता है. बिना मुकदमे किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना सही नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि बिना कोर्ट के आदेश और बिना किसी सुनवाई के फोर्थ शेड्यूल में नाम डालना राज्य की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

POK में सरकार के खिलाफ कई महीनों से चल रहा विरोध

POK में पिछले कई महीनों से सरकार के खिलाफ आंदोलन चल रहा है. इसका नेतृत्व JAAC कर रहा है. संगठन पर 5 जून को प्रतिबंध लगा दिया गया था.

प्रदर्शनकारियों की मांगों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सब्सिडी और बेहतर शासन शामिल हैं. वे पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं.

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आंदोलन के दौरान गिरफ्तारियां हुई हैं. सुरक्षा बलों की कार्रवाई और इंटरनेट पाबंदियों की भी खबरें सामने आई हैं. JAAC का दावा है कि कार्रवाई में 80 से अधिक नागरिक मारे गए हैं. यह आंकड़ा संगठन का दावा है. इसकी स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से होना जरूरी है.

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इरशाद को फोर्थ शेड्यूल में डालने की खबर के बाद कई पाकिस्तानी पत्रकारों और कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर मामला है.

बीबीसी उर्दू के पत्रकार रुहान अहमद ने इरशाद को एक पेशेवर पत्रकार और शोधकर्ता बताया. उन्होंने कहा कि इरशाद हमेशा उन लोगों की आवाज उठाते रहे हैं, जिन्हें अपनी बात रखने के लिए मंच की जरूरत थी. अन्य पत्रकारों ने भी कहा कि आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल पत्रकारिता को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि विरोध प्रदर्शनों और सरकारी कार्रवाई की रिपोर्टिंग करना पत्रकार का काम है.

फोर्थ शेड्यूल में क्या होता है
पाकिस्तान की राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक संस्था NACTA के अनुसार फोर्थ शेड्यूल में शामिल लोगों पर कई तरह की पाबंदियां लग सकती हैं. इनमें यात्रा से जुड़ी रोक, बैंक खातों पर कार्रवाई और आर्थिक गतिविधियों पर निगरानी शामिल हो सकती है.

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इरशाद ने बताया अनुसार उन्हें यह आदेश सीधे नहीं दिया गया था. उन्हें 18 अगस्त को सोशल मीडिया के जरिए अपने नाम के शामिल होने की जानकारी मिली. इसके बाद उन्होंने गृह विभाग के एक सूत्र से इसकी पुष्टि की.

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इस पूरे मामले ने POK में पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिना स्पष्ट आरोप और बिना कोर्ट में दोष साबित हुए किसी पत्रकार को आतंकवाद से जुड़ी निगरानी सूची में क्यों डाला गया.
 

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