नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि उनका देश भारत के साथ सीमा विवाद को हल करने के लिए हमेशा तैयार है. उनके मुताबिक नेपाल ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर बातचीत के जरिए इस मुद्दे का समाधान चाहता है.
नेपाल की संसद के ऊपरी सदन में सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने ये बात कही. विदेश मंत्री खनाल ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच के मजबूत और करीबी रिश्तों पर जोर दिया.
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा, 'नेपाल सरकार भारत और नेपाल के बीच मौजूद करीबी संबंधों और संवेदनाओं का सम्मान करती है. हम ऐतिहासिक समझौतों और नक्शों के आधार पर कूटनीतिक बातचीत के जरिए सीमा मुद्दे को सुलझाने के लिए हमेशा तैयार हैं.'
PM बालेन शाह ने क्या कहा था?
खनाल ने इस दौरान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के मई में संसद में दिए गए बयान का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उसपर विदेश मंत्रालय पहले ही अपना रुख साफ कर चुका है. दरअसल, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा था कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीनों पर कब्जा किया है. उन्होंने इस मामले को सुलझाने के लिए चीन और ब्रिटेन को शामिल करने की बात कही थी.
भारत ने इस मुद्दे पर किसी भी तीसरे देश के दखल को सिरे से खारिज कर दिया था. नेपाल के विपक्षी दलों ने भी बालेन शाह के इस बयान की आलोचना की थी. बाद में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सफाई जारी करते हुए कहा था कि उनका मतलब सीमा के दोनों ओर के स्थानीय लोगों की घुसपैठ से था.
सुस्ता सीमा पर दोनों देश कर रहे मिलकर काम
बुधवार को दक्षिण नेपाल के सुस्ता क्षेत्र में चल रहे सीमा विवाद पर बात करते हुए विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास जो भी काम किया जा रहा है, वो दोनों पक्षों के बीच आपसी तालमेल से हो रहा है. सुस्ता क्षेत्र में 132 मीटर लंबे तटबंध के निर्माण का काम भी दोनों देशों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद ही आगे बढ़ाया गया है. दोनों देशों की संस्थाएं एक-दूसरे के राब्ते में हैं.
पुराने विवादों पर बातचीत का रास्ता
बता दें कि भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है. दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं. भारत का हमेशा से ये रुख रहा है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के जरिए ही हल किया जाना चाहिए.
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इससे पहले 10 जून को विदेश मंत्री खनाल ने संसद को बताया था कि दोनों देशों के बीच सीमा पर आम लोगों के किए गए अतिक्रमण के मामले से निपटने के लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप काम करेगा. उन्होंने ये भी बताया था कि सीमा प्रबंधन पर नेपाल-भारत जाइंट वर्किंग ग्रुप की अगली बैठक इसी साल अगस्त में भारत में आयोजित की जाएगी.
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