नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर की सुरंग से बचकर बाहर निकले एक श्रमिक राज क्षेत्री ने वहां के भयावह हालात की आपबीती सुनाई है. क्षेत्री ने आरोप लगाया कि हाइड्रोपावर में फंसे सैकड़ों श्रमिकों को समय रहते बाहर निकालने की कोशिश नहीं की गई. उन्होंने चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन और उसके सुपरवाइजर की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं.
त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर में इंजीनियरिंग वर्क्स का ठेका चीन की पावर चाइना कॉरपोरेशन को मिला हुआ है और उसके सुपरवाइजरों की निगरानी में वहां काम किया जाता है. क्षेत्री के मुताबिक, बाढ़ के समय नंबर-3 टनल में करीब 265 लोग काम कर रहे थे. उन्होंने दावा किया कि सुरंग के अंदर कई लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे.
क्षेत्री ने बताया कि जब वह सुरंग के भीतर काम कर रहे थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया. उन्होंने चीनी सुपरवाइजर से बाहर निकलने की अनुमति मांगी, लेकिन आरोप है कि सुपरवाइजर ने उन्हें काम जारी रखने को कहा और खुद बाहर निकल गया.
उनके मुताबिक, कुछ ही देर बाद ऊपर से तेज पानी लोगों, वाहनों और सामान को बहाकर नीचे लाने लगा. खतरे को देखते हुए वे सुरंग के मुहाने की ओर भागे और वहां से निकलने में सफल रहे. क्षेत्री ने बताया कि उनके साथ चार लोग भागे थे, लेकिन उनमें से दो अभी भी लापता हैं.
उन्होंने कहा कि सुरंग के अंदर कई शव पड़े हुए हैं और कुछ लोगों के जिंदा होने की आवाजें भी सुनाई देती रही थीं. मदद के लिए हाथ बढ़ाने वाले लोगों को बचा नहीं पाने का दर्द बताते हुए उन्होंने कहा कि उस समय सवाल यह था कि अपनी जान बचाएं या दूसरों को बचाने की कोशिश करें.
जंगल में पेड़ के नीचे गुजारी रात
क्षेत्री ने बताया कि बाढ़ से बचने के बाद उन्होंने शुरुआती दिन जंगल में बिताए और पेड़ के नीचे रात गुजारी. उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का कोई साधन नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस दिन बाढ़ आई, उस दिन मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया था.
उन्होंने कहा कि यदि मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध रहता तो कम से कम श्रमिक अपने परिवारों को सुरक्षित होने की जानकारी दे सकते थे. क्षेत्री के मुताबिक, इलाके में दोबारा मोबाइल नेटवर्क आने के बाद ही वह अपने परिवार से संपर्क कर सके.
चीन पर पूर्व सूचना नहीं देने का आरोप
राज क्षेत्री ने चीन की ओर से कथित तौर पर समय रहते चेतावनी नहीं दिए जाने पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि चीन को पहले से बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की जानकारी थी. उनका कहना है कि यदि समय रहते नेपाल में सूचना पहुंचाई जाती तो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता था और इतनी बड़ी संख्या में जान-माल का नुकसान शायद टाला जा सकता था.
हालांकि, क्षेत्री द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. त्रिशूली-3A की सुरंग में वास्तव में कितने लोग फंसे हैं, कितने लोगों की मौत हुई है और कितने सुरक्षित बाहर निकले हैं, इसका आधिकारिक और पूर्ण आंकड़ा सामने आना अभी बाकी है.
श्रमिक ने बताया अपना खौफनाक अनुभव
श्रमिक ने बताया कि हाइड्रोपावर में काम करने वाले कई श्रमिकों की लाशें टनल में पड़ी हुई हैं. उन्होंने कहा कि कई लोग जिंदा भी थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे. उस वक्त उनके सामने अपनी जान बचाने या दूसरों को बचाने की कोशिश करने की चुनौती थी. उन्होंने कहा कि टनल में फंसे कई लोग हाथ बढ़ाकर मदद मांग रहे थे, लेकिन वह किसी को बचा नहीं पाए.
राज क्षेत्री ने बताया कि जब वह टनल के अंदर काम कर रहे थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ आंधी-तूफान जैसा माहौल बन गया. उन्होंने वहां मौजूद चीनी सुपरवाइजर से बाहर निकलने की अनुमति मांगी, लेकिन आरोप है कि सुपरवाइजर ने उन्हें काम जारी रखने को कहा और खुद बाहर निकल गया. इसके बाद उन्होंने देखा कि ऊपर से तेज पानी लोगों, गाड़ियों और सामान को बहाकर ला रहा था. खतरा देखकर वे टनल के मुहाने की तरफ भागे और बाहर निकलने में सफल रहे. उनके मुताबिक, नंबर-3 टनल में करीब 265 लोग काम कर रहे थे. उनके साथ चार लोग बाहर भागे थे, जिनमें से दो उनके साथ हैं, जबकि दो का अभी पता नहीं है.
उन्होंने बताया कि बाढ़ के बाद शुरुआती दिन जंगल में गुजारे और पेड़ के नीचे रात बिताई. उनके पास मोबाइल फोन नहीं था और किसी से संपर्क करने का कोई साधन नहीं था. उनका कहना है कि जिस दिन बाढ़ आई, उस दिन मोबाइल नेटवर्क भी बंद हो गया था. बाद में नेटवर्क आने पर उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित होने की जानकारी दी. राज क्षेत्री ने चीन पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि चीन को पहले से बाढ़ और भूस्खलन के खतरे की जानकारी थी. अगर समय रहते सूचना दी जाती तो लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया जा सकता था और इतनी जानें नहीं जातीं.
पंकज दास