डस्टबिन में गया इस्लामाबाद MoU... ईरान का ऐलान- US ने तोड़े सारे वादे, हम भी नहीं मानते कोई कमिटमेंट

इस्लामाबाद MoU को पहले ही शक की निगाह से देखा जा रहा था. समझौता होते ही ईरान और अमेरिका ने होर्मुज पर अधिकार जताने की कोशिश कर रही. यहीं से दोनों देश एक दूसरे के खिलाफ हो गए और ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया. आखिरकार 30 दिन बाद ही ये समझौता खत्म हो गया है.

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पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने MoU को लेकर ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ से मुलाकात की थी (File Photo- Social) पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने MoU को लेकर ईरानी संसद स्पीकर गालिबाफ से मुलाकात की थी (File Photo- Social)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:53 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच हुआ शांति समझौता शनिवार को आखिरकार पूरी तरह से खत्म हो गया है. पाकिस्तान की सरपंची में हुई इस्लामाबाद MoU के नाम से चर्चित इस समझौते का चैप्टर अब पूरी तरह से बंद हो गया है. पाकिस्तान ने इस समझौते को लेकर दुनिया भर में वाहवाही लूटने की कोशिश की थी और खुद को शांति का बड़ा पैरोकार बता रहा था. 

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लेकिन अब ईरान ने साफ-साफ कह दिया है वो इस समझौते के किसी भी नियम का पालन नहीं कर रहा है. इस तरह ईरान ने पहली बार कहा है कि इस्लामाबाद समझौता खत्म हो गया है और वे इस समझौते के किसी भी क्लॉज का पालन नहीं कर रहे हैं. 

ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा है कि असल में अमेरिका ने सभी वादों को तोड़ा है और MoU को पूरी तरह से बेकार साबित कर दिया है. 

उन्होंने आगे कहा, "इसके जवाब में हमने भी अपने सभी वादों पर अमल बंद कर दिया है; अब हम उन वादों को पूरा नहीं कर रहे हैं."

आधिकारिक तौर पर यह पहली बार है जब ईरानी कह रहे हैं कि MoU खत्म हो गया है और वे इसकी किसी भी शर्त को लागू नहीं करेंगे. 

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18 जून को समझौता हुआ, 18 जुलाई को डस्टबिन में समझौता

इस्लामाबाद MoU पर 18 जून को समझौता हुआ था. शनिवार 18 जुलाई को 30 दिन बाद ये समझौता डस्टबिन में चला गया. ईरान ने अमेरिका पर इस समझौते के सभी पहलुओं को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि ईरान भी अब समझौते का पालन नहीं कर रहा है. 

इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका-ईरान तनाव को कम करना, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाना और परमाणु कार्यक्रम समेत कई विवादित मुद्दों पर संवाद का रास्ता खोलना बताया गया था.  समझौते के तहत दोनों पक्षों ने कुछ विश्वास-निर्माण उपायों, कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने और भविष्य की वार्ताओं के लिए रूपरेखा पर सहमति जताई. पाकिस्तान ने इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश किया. 

इस्लामाबाद MoU कब से टूटना शुरू हुआ

यह समझौता अमेरिका-ईरान युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही और आगे 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की रूपरेखा पर आधारित था. लेकिन जुलाई की शुरुआत से ही इसमें दरारें दिखने लगीं.

सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही और उसके नियंत्रण को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आईं. होर्मुज स्ट्रेट में जो जहाज ओमानी जल क्षेत्र से होकर गुजर रहे थे ईरान ने उन पर हमला करना शुरू कर दिया, ईरान ने कहा कि होर्मुज से जहाज उसके द्वारा तय रास्ते से ही गुजर सकते हैं. लेकिन कई जहाज होर्मुज में ओमान की ओर से गुजर रहे थे. 

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ईरानी हमले पर अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया दी और ईरानी नौसेना और उसके जहाजों पर हमला करना शुरू कर दिया. इसके बाद अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ तेल निर्यात राहत उपाय वापस लेने शुरू किए, जबकि ईरान ने इसे समझौते का उल्लंघन बताया. 

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका पर फ्रीज हुए फंड जारी न करने और इजरायल की लेबनान में सैन्य कार्रवाई न रोक पाने का आरोप लगाया। जवाब में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौते की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है और युद्धविराम "खत्म" हो चुका है.  इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फिर से सैन्य तनाव बढ़ गया और तकनीकी वार्ताएं भी संकट में पड़ गईं. 

पिछले कुछ दिनों में अमेरिका ने ईरान के बिजली, नौसेना, पोर्ट, ब्रिज जैसे बुनियादी संसाधनों पर हमले किए और उसे तहस-नहस कर डाला. इसके जवाब में ईरान ने भी गल्फ में कुवैत, बहरीन, कतर में मौजूद अमेरिकी बेस पर हमला किया. 

शुक्रवार-शनिवार की दरम्यानी रात को भीषण हमले

शनिवार को अमेरिका और ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़े की लड़ाई तेज़ होने के साथ ही एक-दूसरे के बुनियादी ढांचे और सैन्य ठिकानों पर हमले किए. 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार तड़के बताया कि लगातार सातवीं रात किए गए हमलों में "निगरानी स्थलों, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर, ज़मीन के नीचे बने हथियारों के गोदामों और समुद्री क्षमताओं" को निशाना बनाया गया.

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ईरान ने भी जवाबी हमला किया. कुवैत के अधिकारियों और कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार शनिवार को ईरान द्वारा पानी को खारेपन से मुक्त करने वाले प्लांट (डिसैलिनेशन प्लांट) और तेल सुविधा केंद्र पर हमला करने के बाद कुवैत में सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ. 

इन हमलों में तेल सुविधा केंद्र पर कई लोग घायल हो गए और डिसैलिनेशन प्लांट में आग लग गई, जिससे बिजली बनाने वाली कई यूनिट्स को बंद करना पड़ा. रेगिस्तान वाले इस छोटे से देश में दो दिनों के भीतर डिसैलिनेशन प्लांट पर यह दूसरा हमला था. यह देश अपने पीने के पानी का 90 प्रतिशत हिस्सा इसी प्रक्रिया से प्राप्त करता है.

जॉर्डन में मौजूद अमेरिका के दो सैन्य केंद्रों पर ईरान ने ताबड़तोड़ हमले किए. ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स  ने दावा किया कि उसने लंबी दूरी की मिसाइलों से जॉर्डन के अल-अजराक एयर बेस और वहां मौजूद अमेरिकी कमांड सुविधाओं को निशाना बनाया. इस हमले से वहां भयानक आग लग गई. 

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