ईरान की धमकी का असर! डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को किया कॉल, लेबनान से लौटेगी इजरायली सेना

लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत रोक दी थी और होर्मुज को लेकर सख्त रुख दिखाया था. अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी पहल के बाद इजरायल और हिज्बुल्लाह दोनों ने गोलीबारी रोकने पर सहमति जताई है और बेरूत की ओर बढ़ रही इजरायली सेना को भी वापस बुला लिया गया है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर बयानबाजी बंद करना ही अच्छा कदम होगा (Photo: White House) डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान पर बयानबाजी बंद करना ही अच्छा कदम होगा (Photo: White House)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:45 PM IST

इजरायल और ईरान के बीच जंग रुकने की बातचीत चल रही थी, लेकिन इजरायल के लेबनान में घुसने से सब बिगड़ गया था. ईरान ने अमेरिका से बात करने से इनकार कर दिया और होर्मुज खाड़ी बंद करने की धमकी दे दी. लेकिन अब एक बड़ा मोड़ आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद मोर्चा संभाला. उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बात की और बेरूत की तरफ बढ़ रहे इजरायली सैनिकों को वापस करवा दिया. इतना ही नहीं, ट्रंप के नुमाइंदों ने सीधे हिज्बुल्लाह से भी बात की और हिज्बुल्लाह ने माना कि अब न वो इजरायल पर हमला करेगा, न इजरायल उस पर. फिलहाल गोलीबारी रुकने की उम्मीद बंधी है, लेकिन असली शांति का रास्ता अभी लंबा है. इस बीच ट्रंप ने एक और बात बताई है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है.

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ईरान और अमेरिका के बीच काफी वक्त से तनाव चल रहा है. ये तनाव मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है. लेकिन कुछ वक्त से दोनों देश बीच के देशों यानी मध्यस्थों के जरिए एक-दूसरे से बात कर रहे थे. इस बातचीत से उम्मीद थी कि कोई समझौता हो सकता है और युद्ध जैसी स्थिति टल सकती है.

साथ ही एक अलग मोर्चा भी था. लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई चल रही है. हिजबुल्लाह एक आतंकी ग्रुप है जिसे ईरान का समर्थन हासिल है और जो दक्षिणी लेबनान में काफी ताकतवर है. इजरायल हिजबुल्लाह को अपने लिए बड़ा खतरा मानता है. अब इन दोनों मामलों की आपस में टक्कर हो गई है और इसी से ये नया संकट पैदा हुआ है.

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने NBC न्यूज को बताया कि उन्हें ईरान की तरफ से बातचीत रोकने की खबरों पर कोई संदेश नहीं मिला है. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि 'सच कहूं तो मुझे लगता है हम बहुत ज्यादा बात कर चुके हैं. चुप रह जाना ही अब सबसे बेहतर होगा.'

CNBC से बात करते हुए ट्रंप ने ये भी कह दिया कि अगर ईरान होर्मुज बंद करता है तो उन्हें तेल की कीमतों की कोई चिंता नहीं. और जब पूछा गया कि क्या ईरान के साथ बातचीत खत्म हो गई तो ट्रंप का जवाब था, 'मुझे परवाह नहीं.'

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डोनाल्ड ट्रंप बोले -  नेतन्याहू और हिज्बुल्लाह दोनों माने, बेरूत में नहीं जाएगी इजरायली सेना

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बेहद सकारात्मक बातचीत हुई है. ट्रंप के अनुसार, इजरायल ने बेरूत में सेना नहीं भेजने और आगे बढ़ रही टुकड़ियों को वापस बुलाने का फैसला किया है. उन्होंने यह भी कहा कि हिज्बुल्लाह के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में गोलीबारी रोकने पर सहमति बनी है.

इजरायल ने क्या किया जिससे ईरान भड़क गया?

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इजरायल ने लेबनान के अंदर अपनी सेना को बहुत गहराई तक भेज दिया है. ये पिछले 25 सालों में लेबनान में इजरायल की सबसे बड़ी घुसपैठ है. इजरायली फौज ने दक्षिणी लेबनान में एक ऐतिहासिक किला भी कब्जे में ले लिया, जिसका नाम है ब्यूफोर्ट किला. ये किला करीब 700 मीटर की ऊंचाई पर बना है और वहां से पूरे दक्षिणी लेबनान और उत्तरी इजरायल का नजारा दिखता है. करीब 1000 साल पुराना ये किला कई सेनाओं के लिए अहम रहा है. इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने खुद इसका जिक्र किया और कहा कि ये किला इजरायली सेना की बहादुरी की निशानी है.

इजरायल का कहना है कि वो हिज्बुल्लाह को निशाना बना रहा है जो फाइबर ऑप्टिक ड्रोन से उनके सैनिकों और नागरिकों पर हमले कर रहा है. लेकिन लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजरायल पर आरोप लगाया है कि वो शहरों और कस्बों को पूरी तरह तबाह करने की नीति पर चल रहा है. उन्होंने कहा कि इजरायल लेबनान की यादें मिटाने और लोगों का इतिहास खत्म करने की कोशिश कर रहा है.

अब तक लेबनान में 3300 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं जिनमें दर्जनों बच्चे भी हैं. करीब 10 लाख लोग अपने घर छोड़कर भागने पर मजबूर हुए हैं. इजरायल के भी 25 सैनिक और एक डिफेंस ठेकेदार मारा जा चुका है और दो आम नागरिक भी मरे हैं.

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बातचीत का क्या हुआ?

अप्रैल में अमेरिका ने इजरायल और लेबनान के बीच संघर्षविराम कराया था. लेकिन ये टिका नहीं. अप्रैल में ही इजरायल और लेबनान के बीच वॉशिंगटन में ऐतिहासिक बातचीत शुरू हुई थी. ये तीन दशकों में पहली बार था जब दोनों देशों के अधिकारी सीधे मिल रहे थे क्योंकि इन दोनों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं. पिछले शुक्रवार को पहली बार सीधी सैन्य वार्ता भी हुई.

बातचीत में मुद्दे थे कि इजरायल दक्षिणी लेबनान से अपनी फौज कब और कैसे हटाएगा, लेबनान की अपनी सेना वहां कब तैनात होगी और हिज्बुल्लाह अपने हथियार कब छोड़ेगा. लेकिन हिज्बुल्लाह ने साफ कह दिया है कि जब तक इजरायली सेना लेबनान में है वो हथियार नहीं छोड़ेगा. हिज्बुल्लाह इन बातचीत में शामिल नहीं है और इसके नतीजों को मानने से भी इनकार कर चुका है.

लेबनान के लोग भी इस बातचीत को लेकर बंटे हुए हैं. कुछ इजरायल से नाराज हैं तो कुछ हिज्बुल्लाह से भी गुस्से में हैं जिसने देश में तबाही मचाई. लेबनान के प्रधानमंत्री ने शनिवार को कहा कि ये बातचीत अभी सबसे कम नुकसानदेह रास्ता है लेकिन कोई गारंटी नहीं कि इससे कोई नतीजा निकलेगा.

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ईरान ने क्या कहा?

ईरान ने लेबनान में इजरायल की इस कार्रवाई को बहाना बनाकर अमेरिका से बातचीत रोक दी है. ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तस्नीम ने बताया कि ईरान की टीम ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को संदेश भेजना बंद कर दिया है.

ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि एक मोर्चे पर संघर्षविराम का उल्लंघन सभी मोर्चों पर उल्लंघन के बराबर है. यानी ईरान का मतलब है कि अगर लेबनान में समझौता नहीं माना जा रहा तो ईरान के साथ भी कोई समझौते की बात नहीं होगी. 

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