'गैर-दुश्मन जहाजों को निकलने की अनुमति लेकिन...', स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आया ईरान का बड़ा बयान

ईरान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वे जहाज जो ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं हैं या उसका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए उन्हें ईरानी अधिकारियों के साथ तालमेल बैठाना होगा.

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ईरान ने होर्मुज को लेकर UN को पत्र लिखा है (File Photo- AP) ईरान ने होर्मुज को लेकर UN को पत्र लिखा है (File Photo- AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 25 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:27 AM IST

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बड़ा फैसला लिया है. ईरान ने कहा है कि गैर-दुश्मन जहाज इस रास्ते से गुजर सकते हैं, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को इसकी अनुमति नहीं होगी.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को भेजे एक नोट में दी है. यह मैसेज संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को भी भेजा गया है. 

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ईरान ने अपने नोट में कहा है कि जो देश उसके खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई में शामिल नहीं हैं, उनके जहाजों को स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने की इजाजत दी जाएगी. हालांकि, इसके लिए उन्हें ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करना होगा और तय सुरक्षा शर्तों का पालन करना होगा.

वहीं, अमेरिका, इजरायल या उनके सहयोगियों से जुड़े जहाजों को 'नॉन-होस्टाइल' यानी शांतिपूर्ण श्रेणी में नहीं माना जाएगा और उन्हें इस रास्ते से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ईरान इन्हें 'दुश्मन' मानता है और उनके लिए यह रास्ता बंद रहेगा.

ईरान ने यह भी कहा कि उसने जरूरी और संतुलित कदम उठाए हैं, ताकि विरोधी ताकतें इस अहम समुद्री मार्ग का इस्तेमाल उसके खिलाफ न कर सकें. ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे पत्र में कहा है कि उसने यह कदम हमलावरों को रोकने के लिए उठाया है. ईरान का दावा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी और सही कदम उठा रहा है.

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बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है,  जहां से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले कुल तेल और गैस का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) होकर गुजरता है. पिछले कुछ हफ्तों से युद्ध के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है.

इस स्थिति का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है. तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों बढ़ गई हैं. ईरान के इस फैसले से दुनिया भर के बाजारों में थोड़ी हलचल कम हो सकती है, क्योंकि शर्तों के साथ ही सही, लेकिन एक महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ता खुलने के संकेत मिले हैं.

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