क्या ट्रंप अपनी जेब से देंगे 91000 करोड़ का फंड? 'बोर्ड ऑफ पीस' के लिए किया ऐलान लेकिन...

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नियंत्रण वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है. यह रकम इस साल UN को दिए जाने वाले अमेरिकी योगदान से 12 गुना ज्यादा है. फंडिंग की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.

Advertisement
राष्ट्रपति ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग में फंडिंग का ऐलान किया. (Photo: ITG) राष्ट्रपति ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की मीटिंग में फंडिंग का ऐलान किया. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:31 AM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को खुद के द्वारा स्थापित "बोर्ड ऑफ पीस" को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. यह राशि इस साल यूनाइटेड नेशन को अमेरिका की तरफ से मिलने वाले 767 मिलियन डॉलर से 12 गुना से ज्यादा है, लेकिन ट्रंप क्या ये फंडिंग अपनी जेब से देंगे?

Advertisement

ट्रंप ने बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह संस्था "बेहतर भविष्य बनाने का रास्ता दिखा रही है." उन्होंने कहा, "अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस को 10 अरब डॉलर यानी 91,045 करोड़ रुपये का योगदान देगा. युद्ध की लागत की तुलना में यह बहुत छोटी रकम है. यह केवल दो हफ्ते की लड़ाई के खर्च के बराबर है."

यह भी पढ़ें: गाजा पर ट्रंप की ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक... भारत ने ऑब्जर्वर के तौर पर की शिरकत

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी सरकार यह फंडिंग कैसे देगी. "बोर्ड ऑफ पीस" को ट्रंप और उनके प्रशासन ने एकतरफा तरीके से स्थापित किया है. इसे न तो कांग्रेस और न ही किसी अन्य विधायी निकाय से मंजूरी मिली है. आमतौर पर सरकारी फंड आवंटित करने का अधिकार कांग्रेस के पास होता है.

Advertisement

क्या एकतरफा तरीके से सरकारी फंड का इस्तेमाल कर सकते हैं ट्रंप?

डेमोक्रेट पार्टी के सीनेटर क्रिस मुर्फी ने कहा कि ट्रंप द्वारा एकतरफा तरीके से इस बोर्ड को सरकारी फंड देना "पूरी तरह अवैध" होगा. उन्होंने संकेत दिया कि अगर ऐसा कदम उठाया गया तो इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है.

ट्रंप प्रशासन ने यह भी शर्त रखी है कि जो देश इस बोर्ड के स्थायी सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा. ट्रंप के मुताबिक अब तक 10 देशों ने गाजा राहत पैकेज के लिए 7 अरब डॉलर दिए हैं, जिनमें सऊदी अरब, कतर और यूएई भी शामिल है.

यूनाइटेड नेशन का भी अमेरिका पर बकाया

दूसरी तरफ UN अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका ने न केवल अपने नियमित बजट का पूरा भुगतान नहीं किया है, बल्कि शांति मिशनों जैसे कार्यक्रमों के लिए किए गए वादे भी अधूरे हैं. कुल मिलाकर अमेरिका पर UN का करीब 4 अरब डॉलर बकाया बताए जा रहे हैं.

यह भी पढ़ें: ऊंट के मुंह में जीरा! गाजा को आबाद करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने जोड़े सात अरब डॉलर, समझें- नाकाफी क्यों

गुरुवार को अमेरिका ने इस बकाया में से लगभग 160 मिलियन डॉलर चुका दिए हैं, जो कुल देनदारी का करीब 4 प्रतिशत है और ट्रंप द्वारा घोषित 10 अरब डॉलर का 2 प्रतिशत से भी कम है.  UN ने पिछले साल चेतावनी दी थी कि यदि सदस्य देश, खासकर अमेरिका, अपनी देनदारियां नहीं चुकाते हैं तो संगठन वित्तीय संकट में आ सकता है.

Advertisement

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने उसी भाषण में कहा कि वह UN को "मजबूत" और "व्यवहार्य" बनाना चाहते हैं लेकिन उनके नए बोर्ड को दी जा रही भारी फंडिंग ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कदम वैश्विक संस्था को कमजोर करेगा या समानांतर शक्ति केंद्र बनाने की कोशिश है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement