अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में बोर्ड ऑफ पीस (Board of Peace) की पहली बैठक हुई. इस बैठक का मुख्य फोकस गाजा को फिर से आबाद करने, वहां शांति और स्थिरता लाने पर रहा. इस दौरान 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और गाजा के लिए एक भारी-भरकम फंड पर भी सहमति बनी.
गाजा में शांति बहाली के लिए बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और लगभग एक दर्जन पर्यवेक्षक शामिल हुए, जिनमें कई मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और अन्य देशों के राजनयिक शामिल थे.
इस बोर्ड का उद्देश्य गाजा को फिर से आबाद करना, हमास के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करना और युद्ध के बाद के विकास के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना है. इसी दिशा में इस बैठक में पुनर्निर्माण फंड के लिए कुल सात अरब डॉलर का फंड जुटाने पर सहमति बनी. इसके लिए नौ देशों के बीच सहमति बनी. इसके अलावा अमेरिका ने खुद इस पहल के लिए लगभग दस अरब डॉलर की प्रतिबद्धता की घोषणा की. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह राशि सीधे गाजा के पुनर्निर्माण में कैसे खर्च होगी.
ट्रंप ने बैठक में जोर देकर कहा कि यह बोर्ड शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है और गाजा के नागरिकों के लिए बेहतर भविष्य के निर्माण की दिशा में यह एक अहम कदम है. उन्होंने साझेदार देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि हर योगदान स्थिरता और एक नई आशा में निवेश है.
लेकिन इस बैठक में कहा गया कि यह मौजूदा राशि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए जरूरी अनुमानित 70 अरब डॉलर का सिर्फ एक हिस्सा है. गाजा को फिर से आबाद करने केलिए बड़े निवेश की जरूरत है. बैठक में यह भी संकेत दिए गए कि बोर्ड की भूमिका समय के साथ विश्व के अन्य संघर्षों के समाधान में भी बढ़ सकती है, जिससे इसकी महत्वाकांक्षा व्यापक होती दिख रही है.
ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश शामिल नहीं हुए
गाजा को लेकर बोर्ड ऑफ पीस की इस पहली बैठक में ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे देश शामिल नहीं हुए, जिस वजह से ट्रंप नाराज नजर आए. बैठक के दौरान ट्रंप ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा जैसे कई देशों ने अभी तक उनके बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के न्योते को स्वीकार नहीं किया है.
ट्रंप ने अपने अनोखे अंदाज में कहा कि कुछ देश इस मामले में चतुराई दिखाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन मेरे साथ ऐसी चालाकी नहीं चलेगी. ट्रंप ने बोर्ड को अब तक का सबसे प्रतिष्ठित और ताकतवर समूह बताया है.
क्या है इंटरनेशल स्टैबिलाइजेशन फोर्स?
ट्रंप ने बैठक के दौरान यह भी दोहराया कि हमास के हथियार छोड़ने पर ही गाजा का स्थायी पुनर्निर्माण संभव होगा और उन्होंने बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के काम के पूरक के रूप में काम करने का दावा किया. इसके अलावा बैठक में इंटरनेशल स्टैबिलाइजेशन फोर्स के लिए भी सैनिकों और पुलिस बलों की प्रतिबद्धताओं पर चर्चा हुई, जिसमें कई देशों ने हजारों कर्मियों को तैनात करने का वादा किया है.
इस इंटरनेशनल फोर्स के तहत पांच देश अपने सैनिकों को गाजापट्टी भेजेंगे. ये पांच देश इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया है.
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