फ्रांस में बढ़ती महंगाई को लेकर लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिख रहा है. राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी. कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ. वहीं, लियोन में देशव्यापी प्रदर्शन के दौरान टूरिस्ट ऑफिस की बिल्डिंग और गाड़ी में आग लगा दी गई. यह आंदोलन सिर्फ बढ़ती कीमतों तक सीमित नहीं है. इसमें असमानता, सरकारी खर्च में कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी नाराजगी भी शामिल हो गई है.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, फ्रांस के अलग-अलग शहरों में शनिवार को प्रदर्शन शुरू हुए. देशभर में सैकड़ों जगह विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी. प्रदर्शनकारियों ने चमकीले रंग की जैकेट पहनकर सड़कों पर मार्च किया और कई जगह रास्ते रोक दिए. पेरिस में पुलिस की भारी तैनाती की गई. हालात को देखते हुए कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई.
स्कूलों से शुरू हुआ गुस्सा, अब देशभर में फैला
इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के उत्तरी हिस्से के कुछ स्कूलों से हुई थी. वहां छात्र शिक्षकों की गैरमौजूदगी और स्कूलों की खराब हालत से नाराज थे. शुरुआत में यह विरोध शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें दूसरे मुद्दे भी जुड़ गए.
अब प्रदर्शनकारी बढ़ती कीमतों के साथ आर्थिक असमानता, सरकारी खर्च में कमी और सार्वजनिक सुविधाओं के गिरते स्तर पर सवाल उठा रहे हैं. लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि आम लोगों को बेहतर अवसर और जरूरी सुविधाएं देने वाली व्यवस्था कमजोर पड़ रही है. इसी वजह से स्थानीय स्तर पर शुरू हुआ विरोध अब देशव्यापी आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है.
पेरिस में आंसू गैस, कई प्रदर्शनकारी हिरासत में
पेरिस में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बना रहा. शांज-एलीजे एवेन्यू और आर्क डी ट्रायम्फ जैसे प्रमुख स्थलों के आसपास पुलिस की बड़ी तादाद में मौजूदगी देखी गई. इन जगहों को दो आधिकारिक प्रदर्शनों के तय रास्तों से बाहर रखा गया था.
रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया. हालांकि, हर शहर में हालात एक जैसे नहीं थे. स्ट्रासबर्ग में कुछ प्रदर्शनकारी शांतिपूर्वक मार्च करते नजर आए. वहीं, दूसरे इलाकों में सड़कें रोकने और आगजनी की घटनाओं से तनाव बढ़ा.
लियोन में टूरिस्ट ऑफिस की बिल्डिंग में आग
प्रदर्शन के दौरान लियोन में एक टूरिस्ट ऑफिस की बिल्डिंग में आग लगा दी गई. पेरिस में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक इमरजेंसी वाहन में आग लग गई. दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश की. वहीं, मार्सेई में कचरे के डिब्बों में भी आग लगाए जाने की खबर है. इन घटनाओं के बाद कई शहरों में तनाव का माहौल रहा. पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटाने और हालात काबू में करने में जुटी रही. महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ यह विरोध अब आगजनी और पुलिस के साथ टकराव की घटनाओं के चलते और गंभीर हो गया है.
मैक्रों के लिए क्यों अहम है यह आंदोलन
फ्रांस में हो रहे ये प्रदर्शन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के पिछले कार्यकाल के दौरान हुए विरोध प्रदर्शनों की याद दिलाते हैं. उस समय भी बढ़ती कीमतों और आम लोगों की आर्थिक परेशानियों को लेकर बड़े स्तर पर गुस्सा सामने आया था. इस बार भी महंगाई के साथ शिक्षा, सरकारी सेवाओं और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे आंदोलन का हिस्सा बन गए हैं. यानी लोगों की नाराजगी सिर्फ महंगे होते जीवन तक सीमित नहीं, बल्कि उन सुविधाओं और अवसरों को लेकर भी है जिनकी उम्मीद वे सरकार से करते हैं. देशभर में विरोध की व्यापकता ने सरकार के सामने लोगों की इन शिकायतों से निपटने की चुनौती खड़ी कर दी है.
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