पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में फ्रांस की करीब पांच दशक पुरानी राजनयिक मौजूदगी खत्म होने जा रही है. 1976 में शुरू हुआ फ्रांस का कांसुलेट जनरल अब स्थायी रूप से बंद किया जा रहा है. पाकिस्तान में फ्रांस के निवर्तमान राजदूत निकोलस गेले ने मंगलवार को एक विदाई समारोह के दौरान इसकी जानकारी दी.
विदाई समारोह में फ्रांस के राजदूत निकोलस गेले और कराची में फ्रांस के कांसुल जनरल एलेक्सिस चहताहटिंस्की को सम्मानित किया गया. गेले ने पाकिस्तान में करीब पांच साल बिताने के बाद विदाई को भावुक पल बताया. उन्होंने कराची को एक जीवंत और लगातार बदलता हुआ शहर बताया और कहा कि यह शहर उनकी यादों में हमेशा रहेगा.
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अगले हफ्ते फ्रांस लौटेंगे निकोलस गेले
फ्रांस के अधिकारियों के मुताबिक, कांसुलेट बंद होने के बावजूद पाकिस्तान में फ्रांस की गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी. Alliance Française दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क का प्रमुख केंद्र बना रहेगा. वहीं पाकिस्तान-फ्रांस बिजनेस गठबंधन कारोबारी रिश्तों को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाती रहेगी.
कांसुलेट जनरल एलेक्सिस चहताहटिंस्की ने भी कराची से अपने जुड़ाव को याद किया. उन्होंने बताया कि वह पहली बार 1983 में एक छात्र के तौर पर पाकिस्तान आए थे. कराची में चार साल कांसुलेट जनरल के रूप में काम करने के अनुभव को उन्होंने बेहद यादगार बताया. वह 1 सितंबर को फ्रांस लौटेंगे.
बजट कटौती के चलते बंद हुआ कांसुलेट
फ्रांस के इस कदम के पीछे मुख्य वजह बजट बताई गई है. चहताहटिंस्की के मुताबिक, कराची कांसुलेट को बंद करना फ्रांस की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत विदेशों में राजनयिक मौजूदगी को कम खर्च वाला और ज्यादा सीमित बनाया जा रहा है.
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इसलिए कराची से कांसुलेट का हटना पाकिस्तान के साथ फ्रांस के रिश्ते खत्म होने का संकेत नहीं माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और कारोबारी संपर्क आगे भी जारी रहेंगे.
विदाई समारोह में पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि में आए बदलाव पर भी चर्चा हुई. चहताहटिंस्की ने कहा कि पहले पाकिस्तान को मुख्य रूप से अपराध और आतंकवाद से जुड़ी खबरों के जरिए देखा जाता था, लेकिन हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों में उसकी मध्यस्थता की कोशिशों ने उसकी भूमिका को एक अलग नजरिए से पेश किया है. ऐसे में कांसुलेट का बंद होना राजनयिक रिश्तों से ज्यादा फ्रांस की प्रशासनिक और वित्तीय रणनीति से जुड़ा फैसला है.
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