अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जॉन बोल्टन ने ईरान के साथ हुए नए समझौते को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इस डील को एक बड़ी गलती करार दिया है. बोल्टन के मुताबिक, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम का समाधान किए बिना समझौता करने के फैसला बड़ी गलती साबित हुआ है.
बोल्टन ने इस समझौते को खराब डिप्लोमेसी करार दिया. उन्होंने कहा कि इसमें तेहरान की कई विवादित गतिविधियों पर ध्यान नहीं दिया गया है, जिनमें उसकी परमाणु महत्वाकांक्षाएं, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी नेटवर्क और मिलिटेंट ग्रुप्स को मिलने वाली मदद शामिल हैं.
बोल्टन ने बताया, मुझे लगता है कि ईरान के साथ युद्धविराम एक गलती थी. इससे उन्हें खुद को संभालने और फिर से संगठित होने का मौका मिला.
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उन्होंने जानकारी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए जहाजों को रोकने की ईरान की धमकी के डर से वॉशिंगटन ने एक ऐसा समझौता स्वीकार कर लिया, जिसमें रणनीतिक पहलुओं की अनदेखी की गई.
बोल्टन ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को धमकाने के लिए होर्मुज के इस्तेमाल के मुद्दे ने आखिरकार ट्रंप पर दबाव बना दिया. उन्हें देश के भीतर अपनी राजनीतिक स्थिति की चिंता थी.
अमेरिका के पूर्व अधिकारी ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने व्यापक भू-राजनीतिक नतीजों को नजरअंदाज करते हुए केवल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें कम करने पर ही ध्यान केंद्रित किया.
जॉन बोल्टन ने कहा, ट्रंप और वेंस की बातें सुनकर यह साफ है कि उनका पूरा ध्यान होर्मुज को खोलने पर था ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक तेल आ सके और तेल की कीमतें कम हो सकें. उन्होंने इसके रणनीतिक नतीजों के बारे में नहीं सोचा.
बोल्टन के अनुसार, यह समझौता कई बुनियादी चिंताओं का समाधान करने में विफल रहा. उन्होंने इस बारे में नहीं सोचा कि इसका ईरानी परमाणु कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को लगातार समर्थन, लाइट स्विच की तरह होर्मुज को खोलने और बंद करने की धमकी या ईरान के उन लोगों पर क्या असर पड़ेगा जो इस शासन के दमन का शिकार हो रहे हैं.
उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, इस समय ये सभी चीजें वास्तव में ईरान के पक्ष में हैं.
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