बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद 50(3) के तहत राष्ट्रपति स्पीकर को संबोधित एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर इस्तीफ़ा दे सकते हैं. मोहम्मद शहाबुद्दीन तब विवादों में आ गए थे जब उन्होंने कुछ दिन पहले लंदन यात्रा के दौरान उन्होंने शेख हसीना के साथ संपर्क साधने की कोशिश की थी. बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शेख हसीना भारत में रह रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार मई में सेहत कारणों की वजह से लंदन गए राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शेख हसीना से बात करने की कोशिश की थी. इसके बाद उनकी राजनीतिक निष्ठा को लेकर बांग्लादेश की राजनीति में सवाल उठने खड़े हो गए थे.
बांग्लादेश में अभी BNP की सरकार है और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान वहां के प्रधानमंत्री हैं. शेख हसीना और तारिक रहमान बांग्लादेश के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंदी हैं.
हाल ही में शेख हसीना ने बांग्लादेश लौटने की घोषणा की है. सत्ता परिवर्तन के दौरान ढाका छोड़कर भारत आईं शेख हसीना ने कहा था कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी.
पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक हलकों में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफ़े की संभावना को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं.
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गुरुवार को जानकारी रखने वाले सूत्रों ने संकेत दिया कि वे पद छोड़ने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो गए थे. मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने यह भी दावा किया कि बंगभवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान राष्ट्रपति ने पद छोड़ने की तैयारी करने की बात कही थी.
हालांकि राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन से जब उनके इस्तीफे की वजह पूछी गई तो उन्होंने कहा कि वे कई स्वास्थ्य से जुड़े कारणों पीड़ित हैं. बांग्लादेश के अखबार द डेली स्टार के अनुसार उन्होंने अपने इस्तीफे पर आगे कुछ कहने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मुझे इस मुद्दे पर इससे ज्यादा कुछ नहीं कहना है. राष्ट्रपति के प्रेस सचिव मो. सरवर आलम ने बताया कि स्पीकर हाफिजउद्दीन अहमद ने आज शाम 5:01 बजे इस्तीफा पत्र स्वीकार कर लिया. बांग्लादेश में राष्ट्रपति स्पीकर को ही इस्तीफा देते हैं.
राष्ट्रपति का विवादास्पद फोन कॉल
बांग्लादेश में राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन पर शेख हसीना से फोन पर बात करने का आरोप लगा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2026 में लंदन में चिकित्सा उपचार के दौरान उन्होंने निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बात की. हालांकि इस कॉल की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
बांग्लादेश की मौजूदा सरकार ने इसे शेख हसीना से साठगांठ माना है. इसके बाद उन पर इस्तीफा देने का दबाव था. रिपोर्ट के अनुसार बीएनपी ने इस बाबत राष्ट्रपति भवन तक संदेश भी पहुंचाया था. इसके बाद 23 जुलाई से ही खबरें आने लगी थी कि शहाबु्द्दीन स्वास्थ्य कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.
शहाबुद्दीन 1971 के मुक्ति संग्राम के योद्धा और लोअर ज्यूडिशियरी के पूर्व जज रह चुके हैं.
मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान 24 अप्रैल 2023 को बांग्लादेश के 22वें राष्ट्रपति के रूप में पांच साल के संवैधानिक कार्यकाल के लिए पद संभाला था. उनका कार्यकाल अप्रैल 2028 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से लगभग दो साल पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया है.
बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन एक मात्र ऐसे हाई प्रोफाइल राजनीतिक शख्सियत थे जिनकी नियुक्ति शेख हसीना सरकार के दौरान हुई थी. इस लिहाज से उनका इतने लंबे समय तक अपने पद पर बने रहना बड़ा घटनाक्रम है.
आशुतोष मिश्रा