भारत में ऐशाथ अज़ीमा होंगी मालदीव की नई राजदूत, इब्राहिम शाहीब की लेंगी जगह

सीनियर डिप्लोमैट ऐशाथ अज़ीमा भारत में मालदीव की शीर्ष राजदूत होंगी. वह इब्राहिम शाहीब की जगह लेंगी. 1988 में विदेश सेवा में शामिल होने वाली अज़ीमा जून 2019 से सितंबर 2023 तक चीन में मालदीव की राजदूत के रूप में काम कर चुकी हैं.

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ऐशाथ अज़ीमा ऐशाथ अज़ीमा

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

सीनियर डिप्लोमैट ऐशाथ अज़ीमा भारत में मालदीव की शीर्ष राजदूत होंगी. वह इब्राहिम शाहीब की जगह लेंगी. न्यूज़ पोर्टल Sun.mv ने कहा कि नई दिल्ली में नए राजदूत की नियुक्ति का कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब द्वीपीय देश भारत के साथ अपने संबंधों को सुधारना और मजबूत करना चाहता है. यह कदम राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू द्वारा इस महीने की शुरुआत में भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा पूरी करने के कुछ दिनों बाद उठाया गया है.

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मुइज्जू ने सोमवार को संसद की विदेश संबंध समिति को एक पत्र भेजकर अज़ीमा की नियुक्ति के लिए संसदीय अनुमोदन मांगा. न्यूज पोर्टल ने कहा कि समिति ने मंगलवार को नियुक्ति को मंजूरी दे दी.

1988 में विदेश सेवा में शामिल होने वाली अज़ीमा जून 2019 से सितंबर 2023 तक चीन में मालदीव की राजदूत के रूप में काम कर चुकी हैं. इससे पहले वह ब्रिटेन में मालदीव की उप राजदूत और विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और संयुक्त सचिव सहित विभिन्न वरिष्ठ पदों पर भी काम कर चुकी हैं. शाहीब को अक्टूबर 2022 में नियुक्त किया गया था.

भारत के पड़ोसी द्वीप देश मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू हाल ही में भारत दौरे पर रहे. उनके इस दौरे की भारत में खूब चर्चा रही क्योंकि वो भारत विरोधी रुख के साथ सत्ता में आए थे लेकिन अब उनके इस रुख में धीरे-धीरे नरमी आ रही है. राष्ट्रपति मुइज्जू के इस दौरे में कई समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और यह भी तय हुआ कि भारत और मालदीव मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे. भारत-मालदीव के संबंध सदियों पुराने हैं और भारत मालदीव का सबसे करीबी पड़ोसी और अच्छा दोस्त है.

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इस दौरे पर पीएम मोदी ने बताया कि मालदीव की जरूरत के हिसाब से 400 मिलियन डॉलर की मुद्रा विनिमय डील पर हस्ताक्षर किए गए. भारत के सहयोग से बनाए गए 700 से अधिक सोशल हाउसिंग यूनिट्स भी मालदीव को हैंडओवर किए गए.

भारत के लिए इतना अहम क्यों है मालदीव?
मालदीव हिंद महासागर में बसा एक छोटा सा देश हैं जो रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम है. चीन भारत के पड़ोसी देशों में आर्थिक और रणनीतिक रूप से अपना प्रभाव बढ़ाता जा रहा है. मुइज्जू से पहले मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को भारत समर्थक माना जाता था. उनके शासनकाल में भारत चीन को लेकर निश्चिंत था लेकिन चीनी झुकाव वाले मुइज्जू के सत्ता में आने से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित रखने के लिए भारत को मालदीव का साथ होना बेहद जरूरी है.

रिटायर्ड मेजर जनरल डॉ. अनिल कुमार लाल ने एक ओपिनियन ब्लॉग में लिखते हैं कि हिंद महासागर के क्षेत्रीय द्वीपों में श्रीलंका की तरह ही मालदीव बेहद अहम है. श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर पहले से ही चीन का कब्जा है, इसलिए मालदीव ही एकमात्र ऐसा महत्वपूर्ण देश है जो अब तक भारत के दक्षिण-पश्चिमी समुद्री क्षेत्र की रक्षा कर रहा था. लेकिन अब मालदीव जल्द ही पाकिस्तान के ग्वादर और हंबनटोटा नौसैनिक अड्डों के बीच एक लिंक नौसैनिक अड्डा स्थापित करेगा. 

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