पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार आज (सोमवार)अपना पहला पूर्ण बजट विधानसभा में पेश करेगी. बजट में उद्योग और रोजगार पैदा करने पर भी खास ध्यान दिए जाने की उम्मीद है, क्योंकि सरकार बड़े निवेश को आकर्षित करना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना चाहती है.
अधिकारियों ने बताया कि वित्त मंत्री स्वप्न दासगुप्ता बंगाल सरकार का 2026-27 का बजट पेश करेंगे. बजट में BJP के चुनावी वादों का पालन किए जाने की संभावना है, साथ ही नकद हस्तांतरण-आधारित कल्याणकारी उपायों से हटकर रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और राजस्व जुटाने की ओर बढ़ने का संकेत भी मिल सकता है.
इस साल की शुरुआत में अपने अंतरिम बजट में पिछली TMC सरकार ने 4.06 लाख करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान लगाया था, जिसमें से 1.68 लाख करोड़ रुपये या 41.4 प्रतिशत, सामाजिक क्षेत्र के लिए निर्धारित किए गए थे.
राज्य पर कुल कर्ज़ 7.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है और कर्ज़-GSDP अनुपात लगभग 38 प्रतिशत है, जो बड़े राज्यों में सबसे ज्यादा है. अकेले ब्याज भुगतान पर सालाना लगभग 49,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिससे राज्य की वित्तीय गुंजाइश सीमित हो जाती है.
वित्त विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र के खर्च में कोई बड़ी कटौती होने की संभावना नहीं है. हालांकि, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण योजनाओं की कड़ी जांच और लक्ष्यीकरण किया जा सकता है.
अधिकारी ने PTI को बताया, 'बजट घोषणापत्र के अनुरूप होगा. बुनियादी ढांचे और अन्य पूंजीगत व्यय के साथ-साथ सामाजिक खर्च भी जारी रहेगा, लेकिन महिलाओं की प्रमुख कल्याणकारी योजना के लिए आवंटन बढ़ाए जाने के बावजूद प्रत्यक्ष नकद लाभ भुगतान में वृद्धि पर रोक लगाई जाएगी.'
लक्ष्मी भंडार की जगह लागू होगी अन्नपूर्णा योजना
वित्त विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि सामाजिक क्षेत्र के खर्चों में कोई बड़ी कटौती नहीं होगी, लेकिन डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं की अब कड़ी जांच होगी. पिछली टीएमसी सरकार ने महिला व बाल विकास और सामाजिक कल्याण विभाग के लिए 42,000 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए थे, जिसका बड़ा हिस्सा 'लक्ष्मी भंडार' योजना से जुड़ा था. अब अधिकारी सरकार इस योजना को बदलकर 'अन्नपूर्णा योजना' लागू कर रही है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को अधिक मासिक सहायता दी जाएगी.
सरकारी सूत्रों ने बताया कि जांच और लाभार्थियों के वेरिफिकेशन के बाद पिछली सरकार के 2.4 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 30 लाख अपात्र नामों को लिस्ट से हटा दिया गया है.
बिना नया टैक्स लगाए राजस्व बढ़ाना बड़ी चुनौती
वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि सबसे बड़ी चुनौती कर बढ़ाए बिना राजस्व जुटाना है. जीएसटी व्यवस्था के तहत विकल्प सीमित होने के कारण सरकार अब उत्पाद शुल्क (एक्साइज) और स्टांप ड्यूटी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देगी. इसके लिए रेत और लघु खनिजों के लिए पारदर्शी ई-नीलामी सिस्टम लागू की जाएगी, सरकार की अतिरिक्त जमीनों को लंबे वक्त के लिए पट्टे पर दिया जाएगा और जीएसटी चोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
अधिकारी ने बताया कि निवेश के माहौल को बेहतर बनाने के लिए सरकार भूमि उपलब्धता से जुड़े बड़े सुधारों की घोषणा कर सकती है, जिसमें भूमि की ऊपरी सीमा (अपर लैंड सीलिंग) के मानदंड और अनुपयोगी औद्योगिक भूमि का सही इस्तेमाल शामिल है. बजट में कोलकाता महानगरीय क्षेत्र, दुर्गापुर-आसंसोल, हल्दिया और सिलीगुड़ी के लिए क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक नीतियां बनाई जाएंगी. इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को आसानी से लोन मिलना, ब्याज पर सब्सिडी और क्लस्टर आधारित विकास शामिल हो सकते हैं.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण को बढ़ावा दे सकती है और स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन शुरू कर सकती है.
उत्तर बंगाल को मिल सकता है विशेष पैकेज
बजट में उत्तर बंगाल के लिए विशेष पैकेज शामिल हो सकते हैं, जिनमें पीने के पानी का इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं. हालांकि, कल्याणकारी योजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रतिबद्धता बनी रहने की संभावना है, लेकिन अधिकारियों ने संकेत दिया कि बजट का मुख्य उद्देश्य राज्य की आर्थिक दिशा को निवेश, रोजगार और उद्यम बनाने की ओर ले जाना होगा.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जोर कल्याणकारी योजनाओं पर निर्भरता से हटकर संपत्ति बनाने की ओर बढ़ने पर होगा.'
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