निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका और एक्टिविस्ट तसलीमा नसरीन इन दिनों कोलकाता में हैं. 19 साल बाद बंगाल में उनकी वापसी तो हुई लेकिन ताजा बयानों को लेकर वो घिरी हुई हैं. अब बंगाल जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने उनपर निशाना साधा है.
तसलीमा के धर्म, मस्जिद और मदरसों पर दिए बयान पर सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, 'बंगाल में आकर वो हमें सिखाएंगी. वो हमको ज्ञान दे रही हैं कि धर्म अलग है और राजनीति अलग है. तुम ये सब RSS को सिखाओ, बीजेपी को सिखाओ. RSS-BJP कहती हैं कि धर्म और राजनीति एक साथ करेंगे. अरे जिनकी दावत पर आए हो, उनको सिखाओ, हमें मत सिखाओ.'
सिद्दीकुल्लाह से आगे सवाल हुआ कि तसलीमा कहती हैं कि जितनी मस्जिद बनी हैं, उतनी नहीं बनती तो भी चलता. इसपर सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा, 'वो तो न हिंदू हैं, न मुसलमान. अभी मौका है किसी बड़े बुजुर्ग का हाथ थाम तौबा करें. वो कहने वाली कौन हैं. हम हिंदुस्तानी मस्जिद बनाएंगे. वो थर्ड पर्सन कहने वाली कौन हैं.'
बता दें कि हाल के बयानों के बाद तसलीमा चर्चा में हैं. उन्होंने कहा था कि मदरसों से जिहादी निकलते हैं, उन्होंने सरकार से इसके लिए कड़े कानून लाने को कहा था. साथ ही एक समान कानून (UCC) की वकालत की थी. तसलीमा ने कहा था कि अगर धार्मिक कानून लागू रहे, तो महिलाओं को समान अधिकार नहीं मिलेंगे.
उनके बयान पर मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी आपत्ति जताई थी. AIMPLB ने बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन की इस टिप्पणी को 'भड़काऊ' बताया कि मदरसे नहीं होने चाहिए. बोर्ड ने सरकार से इस टिप्पणी पर गंभीरता से ध्यान देने और विदेशी शरणार्थियों को भारत के आंतरिक मामलों में 'दखल' देने से रोकने की मांग की.
रविवार को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए नसरीन ने कहा था कि मदरसे नहीं होने चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि इनमें से कुछ शिक्षण संस्थान 'जिहादी' तैयार कर रहे हैं और वहां 'बच्चों के शोषण' के मामले भी सामने आ रहे हैं.
AIMPLB ने उनकी टिप्पणियों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने की एक विदेशी नागरिक की गैर-जिम्मेदाराना कोशिश बताया.
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