'TMC फंड से लड़े चुनाव, अब उसी पर सवाल', बागियों पर भड़के कुणाल घोष

तृणमूल कांग्रेस के चुनावी फंड को लेकर चल रहे विवाद पर कुणाल घोष ने बागी नेताओं को घेरा है. उन्होंने चुनावी खर्च, FIR और इस्तीफे को लेकर कई मुद्दों पर सवाल खड़े किए.

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बागी नेताओं के रवैये पर भड़के कुणाल घोष. (Photo: ITG) बागी नेताओं के रवैये पर भड़के कुणाल घोष. (Photo: ITG)

तपस सेनगुप्ता

  • कोलकाता,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 3:18 PM IST

तृणमूल कांग्रेस के चुनावी फंड को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में सियासी घमासान तेज हो गया है. TMC नेता कुणाल घोष ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने चुनाव के दौरान तृणमूल के फंड का इस्तेमाल किया, वही अब उसी खाते और पैसों पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी को फंड के इस्तेमाल पर आपत्ति है, तो पहले चुनाव में मिली रकम लौटानी चाहिए और फिर सवाल उठाने चाहिए.

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कुणाल घोष ने कहा कि उलूबेड़िया पूर्व से चुनाव जीतने वाले ऋतब्रत बनर्जी ने अपने चुनाव प्रचार पर 26.86 लाख रुपये खर्च किए थे. उनके मुताबिक, इस राशि में से 25 लाख रुपये TMC के HDFC बैंक खाते से दिए गए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि जब चुनाव के दौरान पार्टी के फंड का इस्तेमाल किया गया था, तब उस पर कोई आपत्ति नहीं थी. अब उसी खाते को लेकर सवाल उठाना समझ से परे है.

कुणाल घोष ने कहा कि ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल के खाते को लेकर थाने में FIR दर्ज कराई है. उनका कहना है कि यदि उन्हें लगता है कि फंड को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है, तो सबसे पहले उन्हें चुनाव में इस्तेमाल की गई रकम पार्टी को वापस करनी चाहिए. साथ ही चुनाव आयोग के सामने भी अपना पक्ष रखना चाहिए. इतना ही नहीं कुणाल ने यह भी कहा कि कानून के मुताबिक यदि किसी चुनाव में अवैध धन के इस्तेमाल का आरोप लगाया जाता है, तो चुनाव की वैधता पर भी सवाल उठ सकते हैं. ऐसे में आरोप लगाने से पहले जिम्मेदारी निभाना जरूरी है.

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कुणाल घोष ने एक अन्य नेता संदीपन साहा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि संदीपन साहा ने चुनाव प्रचार में 27.01 लाख रुपये खर्च किए थे. इस पूरे विवाद के बीच उन्होंने चुनावी खर्च और पार्टी फंड के इस्तेमाल को लेकर कई सवाल उठाए.

काकली घोष दस्तिदार पर भी टिप्पणी

काकली घोष दस्तिदार को लेकर कुणाल घोष ने कहा कि वे तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंची हैं. उनका कहना था कि यदि कोई नेता अलग राजनीतिक रास्ता चुनना चाहता है, तो पहले उसे अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. इसके बाद ही नई राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

राज्य के बजट को लेकर कुणाल घोष ने कहा कि नई सरकार को काम करने का समय मिलना चाहिए. उनके मुताबिक, सरकार के कामकाज का आकलन पहले दिन से नहीं किया जा सकता. उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य के बकाया मुद्दों पर आगे प्रगति होगी और लोगों को मिलने वाली योजनाओं का लाभ जारी रहेगा.

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