वाराणसी में जलभराव की समस्या को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है. शहर में भारी बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने और पंप बंद रखे जाने के मामले में उत्तर प्रदेश जल निगम के अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता को निलंबित कर दिया गया है. पवन कुमार गुप्ता उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के निर्माण खंड में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात थे. सरकार ने उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली-1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक जांच भी बैठाई है. नगर विकास विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रथम दृष्टया जांच में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं. जांच में पाया गया कि चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर नदी के बैकफ्लो को रोकने के लिए जरूरी गेट या बैरियर लगाने को लेकर आवश्यक आकलन और कार्ययोजना तैयार नहीं की गई.
इसके अलावा उच्चाधिकारियों की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई. जांच में सबसे अहम बात यह सामने आई कि 3 और 4 सितंबर को चौकाघाट सीवेज पम्पिंग स्टेशन और गोईठहां एसटीपी पर स्थित पंप बंद रखे गए थे. भारी बारिश के दौरान पंप समय पर नहीं चलाए जाने से सीवर लाइनों पर अत्यधिक दबाव पड़ा. इसका असर शहर के निचले इलाकों में दिखाई दिया और कई जगह जलभराव की स्थिति पैदा हो गई. जलभराव के कारण आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा. इसके साथ ही विभाग की कार्यप्रणाली और छवि पर भी सवाल उठे. सरकार ने प्रथम दृष्टया जांच में सामने आई इन लापरवाहियों को गंभीरता से लिया और अधिशासी अभियंता के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की.
पंप बंद रखने पर हुई कार्रवाई
वाराणसी में जलभराव की स्थिति को लेकर नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था. मंत्री ने 12 और 13 सितंबर को वाराणसी दौरे के दौरान जलभराव से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से जल निकासी की व्यवस्था युद्धस्तर पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. निरीक्षण के दौरान नगर विकास मंत्री ने शहर में जलभराव की स्थिति पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि लापरवाही करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद अब शासन स्तर पर अधिशासी अभियंता पवन कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई है. सरकार ने इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट किया है कि जनसुविधाओं से जुड़े मामलों में लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. खासकर जल निकासी जैसी व्यवस्था में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी से जवाब लिया जाएगा.
नियम-7 के तहत अनुशासनिक जांच
पवन कुमार गुप्ता के निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक जांच भी शुरू कर दी गई है. उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के मुख्य अभियंता क्रय, लखनऊ को इस मामले में पदेन जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सरकार की ओर से कहा गया है कि जनसमस्याओं के प्रति लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा.
निलंबन के बाद पवन कुमार गुप्ता को मुख्य अभियंता कानपुर क्षेत्र, उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के कानपुर कार्यालय से संबद्ध किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा. वाराणसी में जलभराव को लेकर हुई इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के तौर पर देखा जा रहा है. सरकार ने साफ संकेत दिया है कि बारिश और जलभराव जैसी जनसमस्याओं से निपटने में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
समर्थ श्रीवास्तव