चीनी के दानों से अब प्लास्टिक बनाने की तैयारी है. यूपी में बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड की लखीमपुर खीरी स्थित कुंभी चीनी मिल प्लांट में पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) बनाने के लिए विदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस परियोजना के लिए बेल्जियम से मंगाया गया विशाल रिएक्टर करीब पांच महीने का सफर तय कर वाराणसी पहुंचा है.
रिएक्टर लेकर महाकाय ट्रेलर सोमवार को काशी पहुंचा. सोमवार शाम को लंका टोल प्लाजा पर पहुंचा. महाकाय ट्रेलर को डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ने के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाया गया था. आज सुबह जैसे ही वैकल्पिक रास्ते से बढ़ा तो वो कच्चे रोड में धंस गया. जिसको निकालने के लिए दो ट्रेलर, क्रेन मशीन सहित अन्य मशीन आगे निकालने के लिए टेक्निकल टीमें लगी हुई है.ट्रेलर को पीछे से हटाने के लिए लोहे की चादर बिछाने का कार्य किया जा रहा है.ट्रेलर को पीछे कर मिट्टी पर लोहे की चादर बिछा कर आगे निकालने की तैयारी चल रही है.
लोगों ने बताया कि बाहुबली ट्रेलर शाम से यहां पर खड़ा हुआ है. इससे बड़ा ट्रेलर अभी तक देखा नहीं है. लोग यहां पर हजारों की संख्या में पहुंच रहे हैं. सेल्फी ले रहे हैं. रील बनाकर यादगार बनाने का काम कर रहे हैं. NHAI के अधिकारी ने बताया कि यहां पर जितनी भी व्यवस्था दिख रही है, ट्रेलर वालों की खुद की व्यवस्था है. उनके साथ दो ट्रेलर, हाइड्रा, दो ट्रक चल रहे हैं. यह अपना सामान लेकर भी जाएंगे. यह अपना टोल प्लाजा का शुल्क देकर आगे बढ़ते हैं.
यह रिएक्टर अप्रैल में बेल्जियम से रवाना हुआ था. इसके बाद यह समुद्री और सड़क मार्ग से ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा. इसे विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर के जरिए ले जाया जा रहा है. इस पूरे परिवहन पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आने की बात बताई गई है. देखें VIDEO:-
चीनी से बनेगा PLA प्लास्टिक
कुंभी चीनी मिल में प्रस्तावित परियोजना की खासियत यह है कि यहां चीनी के दानों से पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) तैयार किया जाएगा. PLA को प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है और इसे बायोडिग्रेडेबल सामग्री के रूप में भी जाना जाता है.
बताया गया कि यह तकनीक विदेशी तकनीक पर आधारित है और देश में इस तरह की परियोजना को लेकर इसे अहम पहल माना जा रहा है.परियोजना के तहत करीब 3000 करोड़ रुपये के प्लांट का निर्माण किया जा रहा है. इसे सेटअप करने का काम विदेशी टेक्निकल करने का काम जाएगा.
एक महीने में इंस्टॉलेशन का लक्ष्य
बेल्जियम से आए इस विशाल रिएक्टर को प्लांट तक पहुंचाने के बाद अब इसे स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होगी. अधिकारियों के अनुसार, रिएक्टर की इंस्टॉलेशन प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लग सकता है. इस पूरी परियोजना में उत्तर प्रदेश सरकार का भी सहयोग मिल रहा है.परियोजना की प्रगति की रोजाना मॉनिटरिंग किए जाने की बात सामने आई है.
वाराणसी में 6 फुट ब्रिज हटाने की चुनौती
भारी-भरकम रिएक्टर को आगे ले जाने के दौरान वाराणसी में भी कई चुनौतियां सामने आईं. इसके सुरक्षित आवागमन के लिए मार्ग में आने वाले करीब 6 फुटब्रिज हटाने की जरूरत बताई गई है. इसके बाद ही यह विशालकाय ट्रेलर अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ सकेगा. चीनी से प्लास्टिक बनाने वाली इस परियोजना ने तकनीक, परिवहन और औद्योगिक निवेश तीनों स्तरों पर लोगों का ध्यान खींचा है.
aajtak.in