लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की जिला अदालत ने महत्वपूर्ण सुनवाई के बाद अपना फैसला 15 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया है. अदालत ने शिकायतकर्ता और राहुल गांधी की ओर से पेश किए गए तर्क सुनने के बाद यह आदेश दिया.
यह मामला स्थानीय भाजपा नेता विजय मिश्रा द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है. विजय मिश्रा ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें राहुल गांधी की कथित मानहानिकारक टिप्पणी वाली सीडी की फोरेंसिक जांच कराने की मांग खारिज कर दी गई थी. शिकायतकर्ता का कहना है कि सीडी में मौजूद आवाज का मिलान राहुल गांधी की आवाज से कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कथित बयान उन्हीं का है या नहीं.
विजय मिश्रा ने 21 मई को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) की अदालत में यह पुनरीक्षण याचिका दायर की थी. उनके वकील संतोष कुमार पांडेय ने अदालत में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए फोरेंसिक जांच की मांग को उचित बताया. उन्होंने कहा कि इस याचिका में कई कानूनी और तकनीकी पहलू जुड़े हैं, इसलिए अदालत में विस्तृत बहस हुई.
शिकायतकर्ता की दलीलों के बाद राहुल गांधी की ओर से भी अदालत में अपना पक्ष रखा गया. दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखते हुए 15 जुलाई को फैसला सुनाने की तारीख तय की.
यह मामला करीब आठ साल पहले कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है. आरोप है कि उस दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर मानहानिकारक टिप्पणी की थी. इसी को आधार बनाकर विजय मिश्रा ने सुल्तानपुर की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए मुकदमे की सुनवाई शुरू की थी.
इस मुख्य मानहानि मामले में राहुल गांधी को 20 फरवरी 2024 को जमानत मिल चुकी है. वहीं, 26 जुलाई 2024 को अदालत में उनका बयान भी दर्ज किया गया था. अब इस मामले की अगली सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में 6 जुलाई को होगी, जबकि फोरेंसिक जांच की मांग पर जिला अदालत 15 जुलाई को अपना फैसला सुनाएगी.
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