उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी करीब छह महीने का वक्त बाकी है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. सभी प्रमुख दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में जुटे हैं. इसी क्रम में कानपुर में समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया, जिसने सियासी हलचल बढ़ा दी है. कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मंच के पीछे लगा वह बैनर रहा, जिस पर लिखा था- “ब्राह्मण चला अखिलेश के संग.” यह नारा राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है.
कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के बलिया से सांसद सनातन पांडेय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने बड़ी तादाद में मौजूद ब्राह्मण समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए आगामी चुनाव में सपा के समर्थन की अपील की.
हालांकि, समाजवादी पार्टी प्रदेश स्तर पर पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के नारे को आगे बढ़ा रही है, लेकिन कानपुर का यह सम्मेलन यह संकेत भी देता है कि पार्टी उन ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है, जो भाजपा से नाराज बताए जा रहे हैं.
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
सम्मेलन में वक्ताओं ने ब्राह्मण समाज से जुड़े मुद्दों, कथित उत्पीड़न और दर्ज मुकदमों का भी उल्लेख किया. मीडिया से बातचीत में सांसद सनातन पांडेय ने कहा कि यह आयोजन 5 अगस्त को लखनऊ में होने वाले समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र के जन्मोत्सव कार्यक्रम की तैयारियों के तहत किया गया है.
उन्होंने दावा किया कि अगर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो ब्राह्मण समाज को पूरा सम्मान और सुरक्षा दी जाएगी. उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी शासनकाल में ब्राह्मणों को सम्मान मिला था और दोबारा सत्ता में आने पर पार्टी कार्यकर्ता हर जरूरतमंद के साथ खड़े रहेंगे.
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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर पूछे गए सवाल के जवाब में सांसद सनातन पांडेय ने आरएसएस और चंपत राय पर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की.
एसपी सांसद सनातन पांडेय ने कहा, "जैसे-जैसे यूपी में चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनीतिक दल तमाम जातीय और सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिशें तेज कर रहे हैं. कानपुर का यह ब्राह्मण सम्मेलन भी इसी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है."
सिमर चावला