कांवड़ यात्रा में एक तरफ आस्था है, दूसरी तरफ कई किलोमीटर पैदल चलने की चुनौती. कंधे पर कांवड़, पैरों में छाले, शरीर में थकान और मंजिल अभी दूर. ऐसे में सहारनपुर से गुजर रहे कांवड़ियों के लिए एक ऐसा मेडिकल कैंप लगाया गया है, जहां सिर्फ दवा और मरहम-पट्टी नहीं हो रही, बल्कि थके हुए पैरों की मसाज भी मशीनों से की जा रही है. और मशीन भी एक-दो नहीं... पूरी 21.
कांवड़ लेकर लगातार पैदल चलने से सबसे ज्यादा असर पैरों पर पड़ता है. इसी परेशानी को देखते हुए कैंप में फुट मसाज और थाई मसाज मशीनें लगाई गई हैं. कांवड़िया अपनी यात्रा के बीच यहां रुकते हैं. जूते-चप्पल उतारते हैं, कुछ देर आराम करते हैं और फिर मशीन के जरिए पैरों की मसाज शुरू हो जाती है. जरूरत पड़ने पर हाथ से भी मालिश की जा रही है. यानी पैरों ने कहा- बस अब नहीं चला जाता. तो कैंप का जवाब है- पहले थोड़ा आराम कर लो, फिर चलना.
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ये सिर्फ मसाज सेंटर नहीं है. कैंप में छह डॉक्टरों की टीम मौजूद है. किसी कांवड़िये को चोट लगी है, पैर में छाला है, रैशेज हो गए हैं या दर्द ज्यादा है, तो प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी यहीं है. ड्रेसिंग और मलहम-पट्टी के लिए अलग इंतजाम किया गया है. दर्द के लिए दवाइयां और तेल हैं. रैशेज के लिए जरूरी दवाएं हैं और मसाज के लिए अलग तेल भी रखा गया है. मतलब कांवड़िया यहां सिर्फ पैरों की थकान लेकर आए और इलाज के बाद राहत लेकर आगे निकल जाए.
कैंप के चेयरमैन दीपक खेड़ा के मुताबिक, कांवड़ियों की सेवा का ये सिलसिला 20वें साल में पहुंच चुका है. पिछले साल यहां छह मसाज मशीनें लगाई गई थीं. इस बार संख्या बढ़ाकर 21 कर दी गई. हर साल कांवड़ यात्रा में आने वाले लोगों की जरूरतें बदल रही हैं. भोजन की व्यवस्था तो लगभग हर शिविर में होती है, लेकिन लगातार पैदल चलने के बाद शरीर को आराम और पैरों को राहत भी उतनी ही जरूरी है. इसी सोच के साथ इस बार मसाज की सुविधा को बड़ा किया गया है.
अब मोबाइल की बैटरी भी खत्म नहीं होगी
अब जरा उस चीज की बात, जिसके बिना आजकल यात्रा अधूरी लगती है- मोबाइल. कांवड़ यात्रा में लोग फोन से घरवालों से बात करते हैं, लोकेशन देखते हैं, फोटो-वीडियो बनाते हैं और जरूरी होने पर संपर्क भी करते हैं. लेकिन इतनी लंबी यात्रा में मोबाइल की बैटरी कब जवाब दे दे, पता नहीं. इसलिए कैंप में दो बड़े मोबाइल चार्जिंग स्टेशन भी बनाए गए हैं. इनमें एक साथ करीब 500 से 600 मोबाइल फोन चार्ज किए जा सकते हैं. यानी कांवड़िया कुछ देर आराम करे, पैर की मसाज कराए और साथ में मोबाइल भी चार्ज कर दे.
बारिश में पावर बैंक भी कितना साथ देगा?
कैंप संचालकों का कहना है कि इस समय बारिश का मौसम है. ऐसे में हर व्यक्ति के लिए पावर बैंक या अतिरिक्त बैटरी साथ लेकर चलना आसान नहीं होता. इसलिए चार्जिंग स्टेशन बनाया गया है. कांवड़िया 10, 20 या 50 मिनट रुककर फोन चार्ज कर सकता है और फिर अपनी यात्रा पर आगे बढ़ सकता है.
कांवड़ यात्रा के रास्ते में जगह-जगह शिविर लगाए जाते हैं. कहीं भोजन मिलता है, कहीं पानी, कहीं आराम की जगह. लेकिन सहारनपुर के इस कैंप ने सेवा को थोड़ा और आगे बढ़ाया है. यहां कोशिश है कि कांवड़िया जब थककर पहुंचे, तो उसे सिर्फ खाना देकर रवाना न किया जाए. उसके पैरों का दर्द भी कम किया जाए. छाले हैं तो पट्टी की जाए. रैशेज हैं तो दवा दी जाए. दर्द है तो इलाज मिले. और मोबाइल की बैटरी खत्म है तो उसे भी चार्ज कर दिया जाए.
कैंप के चेयरमैन दीपक खेड़ा के मुताबिक, मकसद एक ही है- कांवड़ियों की आगे की यात्रा सुगम और सुरक्षित हो. क्योंकि कांवड़िया यहां आराम करने के लिए कुछ देर रुकता है, लेकिन उसकी मंजिल अभी बाकी होती है.
राहुल कुमार