18-20 हजार सैलरी में खरीदी डेढ़ करोड़ की जमीन! ऐसे रडार पर आए राम मंदिर में चढ़ावा गिनने वाले दो कर्मचारी

Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं. आरोप है कि दानपात्र से पैसे निकालने और गिनने की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ कर्मचारियों ने करोड़ों रुपये का चढ़ावा हड़प लिया. मामला तब चर्चा में आया जब अखिलेश यादव ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया.

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SIT जांच के बीच कर्मचारियों की संपत्ति बनी सबसे बड़ा सवाल (Photo: ITG) SIT जांच के बीच कर्मचारियों की संपत्ति बनी सबसे बड़ा सवाल (Photo: ITG)

मयंक शुक्ला

  • अयोध्या, उत्तर प्रदेश,
  • 13 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:32 PM IST

उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में हर दिन लाखों श्रद्धालु आते हैं और भगवान राम के लिए पैसे, गहने और दूसरी चीजें चढ़ाते हैं. यह दान मंदिर के दानपात्रों यानी बक्सों में जमा होता है. इन बक्सों से पैसे निकालने और गिनने का काम कुछ कर्मचारियों को दिया गया था. अब आरोप यह है कि इन्हीं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं के चढ़ावे में से करोड़ों रुपये चुरा लिए. यह मामला इसलिए और बड़ा हो गया क्योंकि जिन कर्मचारियों की तनख्वाह महीने के 18 से 20 हजार रुपये थी, उन्होंने करोड़ों की जमीन और प्लॉट खरीद लिए. बस यहीं से पूरा मामला खुला और अब SIT जांच हो रही है.

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यह मामला तब सुर्खियों में आया जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. अखिलेश यादव इस मामले को सबसे पहले सामने लाने वालों में से हैं.  उनके मामला उठाने के बाद ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मची और फिर जांच की मांग और एक्शन शुरू हुआ.

शनिवार को उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘इस षड्यंत्र का मूल दूर नहीं है’ इसलिए सच में कार्रवाई करने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि दोषी के बारे में पता करने में पुलिस अक्षम तो हम सहायता कर दें.'

कर्मचारियों के आमदनी और उनकी संपत्ति में जमीन-आसमान का अंतर

राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे गिनने का काम कुछ खास कर्मचारियों को दिया गया था. यह काम बेहद जिम्मेदारी का था क्योंकि रोज हजारों श्रद्धालु दान देते हैं. लेकिन जांच एजेंसियों को शक हुआ कि इन कर्मचारियों की आमदनी और उनकी संपत्ति में जमीन-आसमान का फर्क है. 

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एक कर्मचारी ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी और दूसरे ने करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट लिया. जबकि दोनों की तनख्वाह सिर्फ 18 से 20 हजार रुपये महीने की थी. यह देखकर जांच शुरू हुई. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे को उठाया था, जिसके बाद मामला पूरे प्रदेश में सुर्खियों में छा गई.

लवकुश मिश्रा कौन है और क्यों है चर्चा में?

इस पूरे मामले में सबसे पहला नाम आया लवकुश मिश्रा का. यह युवक अयोध्या के पास रुदौली के शुजागंज इलाके के मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है. उसकी जिम्मेदारी राम मंदिर में दानपात्रों से पैसे निकालने और गिनने की थी. 

जांच टीम जब उसके घर पहुंची तो वहां से 10 लाख रुपये नकद मिले. इनमें से कुछ पैसे घर की आलमारी में रखे थे और कुछ पैसे गोबर के ढेर में छिपाकर रखे गए थे. गांव के लोग भी बताते हैं कि राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद से लवकुश की आर्थिक स्थिति बहुत तेजी से बदली थी.

लवकुश के पिता ने क्या कहा?

लवकुश के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि उनका बेटा बिल्कुल निर्दोष है. उन्होंने माना कि घर से 10 लाख रुपये मिले हैं लेकिन यह पैसे उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर जुटाए थे. उन्होंने यह भी कहा कि फैजाबाद में जो मकान बन रहा है उससे उनके बेटे का कोई लेना-देना नहीं है.

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यह भी पढ़ें: गोबर के ढेर में छिपा रखा था कैश... राम मंदिर कर्मचारी के घर से 10 लाख रुपये बरामद, पिता ने बयां की अलग कहानी

अभी तक जांच में क्या हुआ?

SOG ने लवकुश मिश्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. उससे यह जानने की कोशिश हो रही है कि पैसे गिनने की पूरी प्रक्रिया में उसकी क्या भूमिका थी और किस तरह से पैसे गायब किए गए.

जांच टीम में 6 सदस्य थे. दो पुलिस वाले वर्दी में थे और चार सादे कपड़ों में. इन्होंने लवकुश के घर की तलाशी ली और वहां से नकदी बरामद की. एक और कर्मचारी को भी शक के आधार पर हिरासत में लिया गया है और उससे भी पूछताछ चल रही है.

जांच एजेंसियां मंदिर परिसर के CCTV फुटेज को ध्यान से देख रही हैं. इसके साथ ही वित्तीय रिकॉर्ड यानी पैसों के हिसाब-किताब की भी गहराई से जांच की जा रही है.

SIT का गठन

मामले की गंभीरता को देखते हुए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT यानी विशेष जांच दल बनाकर जांच कराने की मांग की. इस मांग पर यूपी सरकार ने SIT बना दी.

इस SIT का अध्यक्ष लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को बनाया गया है. IPS अफसर किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को इसका सदस्य बनाया गया है.

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SIT को 7 दिनों के अंदर शुरुआती रिपोर्ट देनी है और 15 दिनों के अंदर पूरी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है.

निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा का दौरा

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा 5 दिनों के अंदर दूसरी बार अयोध्या पहुंचे. उन्होंने मंदिर में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की. जब उनसे दान चोरी के मामले पर बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने साफ कहा कि उनकी जिम्मेदारी सिर्फ निर्माण कार्यों की निगरानी तक है और इस मामले पर वे कोई बात नहीं करेंगे.

कैबिनेट मंत्री ने क्या कहा?

यूपी के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ट्रस्ट ने जांच शुरू कर दी है और अपने नियमों के हिसाब से जरूरी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा.

BJP नेता विनय कटियार की नाराजगी

पूर्व सांसद और वरिष्ठ BJP नेता विनय कटियार ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है. मंदिर आंदोलन में हजारों कार्यकर्ता जेल गए और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपनी कुर्सी तक छोड़ दी थी. ऐसे में मंदिर से जुड़ा कोई भी भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगा.

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उन्होंने यह भी कहा कि वे SSP और DIG को आवेदन देकर दोषियों की गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजने की मांग करेंगे.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी केस में SIT गठित, IAS अफसर के नेतृत्व में जांच, SOG हिरासत में कर्मचारी

समाजवादी पार्टी ने क्या कहा?

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राम मंदिर के चढ़ावे में भ्रष्टाचार की बात सार्वजनिक रूप से उठाई थी. वो इस मामले को सबसे पहले सामने लाने वालों में से हैं. उनके मुद्दा उठाने के बाद यह मामला तेजी से सुर्खियों में आया. फिर SIT का गठन हुआ और अब लगातार एक्शन जारी है.

सपा नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद छोड़ देने चाहिए.

उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े महिपाल सिंह ने पहले ही चढ़ावे में गड़बड़ी के सवाल उठाए थे जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए था. उन्होंने मांग की कि अगर पदाधिकारी सच में निर्दोष हैं तो वे खुद आगे आकर स्वतंत्र जांच का समर्थन करें.

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