आकाश से बरसती फूल की पंखुड़ियां, सिर पर कलश उठाए हजारों की संख्या में महिलाएं और 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजता ऊंचाहार का विशाल पंडाल. मंच पूरी तरह आध्यात्मिक है, लेकिन इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों तक साफ सुनाई दे रही है. उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडेय की ओर से आयोजित शिव महापुराण कथा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने इस आयोजन को सिर्फ एक धार्मिक कथा तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले रायबरेली के सियासी समीकरण साधने की मजबूत कवायद के रूप में देखा जा रहा है.
रायबरेली लंबे समय से कांग्रेस और गांधी परिवार का मजबूत राजनीतिक गढ़ रहा है. लोकसभा चुनावों में विपक्ष की मजबूत पकड़ के बाद बीजेपी अब यहां आक्रामक राजनीतिक भाषणों के बजाय 'माइक्रो-लेवल' पर सांस्कृतिक और धार्मिक लामबंदी की रणनीति पर काम कर रही है.
कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की मौजूदगी में हो रहे इस विशाल आयोजन के जरिए पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि गांधी परिवार के प्रभाव वाले क्षेत्र में हिंदुत्व का कोर नैरेटिव किस कदर जमीनी पकड़ बना रहा है. बिना किसी राजनीतिक झंडे और सीधे चुनावी नारे के, आस्था के जरिए मतदाताओं को एक मंच पर लाना बीजेपी की दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है.
मनोज पांडेय का 'शक्ति प्रदर्शन' और अवध के जातीय समीकरण
समाजवादी पार्टी से बीजेपी में आए और योगी कैबिनेट में जगह पाने वाले ऊंचाहार विधायक मनोज कुमार पांडेय के लिए यह आयोजन अपनी जमीनी ताकत दिखाने का बड़ा मौका है. रायबरेली और आसपास के अवध क्षेत्र में ब्राह्मण और ठाकुर राजनीति हमेशा से सत्ता की दिशा तय करती रही है.
मनोज पांडेय (ब्राह्मण चेहरा) के बुलावे पर खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कथा पंडाल में पहुंचना न केवल मंत्री के कद पर मुहर लगाता है, बल्कि सवर्ण और कोर हिंदू मतदाताओं के बीच एकजुटता का सीधा संदेश भी देता है. मंच पर दोनों नेताओं की मौजूदगी यह संकेत देती है कि बीजेपी अपने नए सहयोगियों को इलाके में बड़े 'हिंदू चेहरे' के रूप में स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही.
कलश यात्रा से 'साइलेंट वोटर' पर सीधा प्रभाव
पंडित प्रदीप मिश्रा के आयोजनों की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की भारी भागीदारी होती है. कथा से पहले निकली ऐतिहासिक कलश यात्रा में जिस तरह हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया, उसे चुनाव विश्लेषक 'मातृशक्ति आउटरीच' से जोड़कर देख रहे हैं.
हाल के चुनावों में महिला मतदाता सबसे निर्णायक 'स्विंग वोटर' साबित हुई हैं. धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और कथा के जरिए बिना किसी राजनीतिक बहस के सीधे परिवारों और महिलाओं के बीच पैठ बनाना बीजेपी के उस अभियान को धार देता दिख रहा है, जिसकी काट ढूंढना विपक्ष (सपा-कांग्रेस गठबंधन) के लिए आसान नहीं होगा.
2027 का रोडमैप: मंच धार्मिक, संदेश राजनीतिक
रायबरेली का यह आयोजन साफ संकेत दे रहा है कि बीजेपी 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है. जहां विपक्ष अपने पारंपरिक जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर भरोसा जता रहा है, वहीं बीजेपी आस्था, हिंदुत्व आउटरीच और सामाजिक इंजीनियरिंग के मिश्रण से विपक्षी किले में गहरी दरार डालने की कोशिश में जुट चुकी है.
आयोजक और प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि भगवान शिव की कृपा से ऊंचाहार की पावन धरती पर श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन हो रहा है. लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति सनातन संस्कृति और भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट आस्था का प्रमाण है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन समाज को संस्कार, सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का माध्यम बन रहा है.
समर्थ श्रीवास्तव