उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अपने पालतू डॉग 'जॉनी' की मौत के बाद इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे वकील अनुभव परिहार को करीब तीन साल बाद बड़ी राहत मिली है. प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने इंडियन प्रेस चौराहे पर संचालित एक डॉग केयर सेंटर को सील कर दिया है. यह कार्रवाई अनुभव परिहार की लगातार शिकायतों, आरटीआई और कानूनी प्रयासों के बाद हुई. हालांकि अनुभव का कहना है कि उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और जॉनी को असली इंसाफ तब मिलेगा, जब अदालत दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी.
यह मामला 10 सितंबर 2023 का है. अनुभव परिहार अपने पालतू डॉग जॉनी को ग्रूमिंग (बाल कटवाने) के लिए इंडियन प्रेस चौराहे स्थित डॉग केयर सेंटर लेकर गए थे. अनुभव का आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने उनसे कहा कि एक इंजेक्शन लगाना पड़ेगा, तब यह आराम से बाल कटवा लेगा. इसके बाद डॉक्टर ने जॉनी को इंजेक्शन लगाया और जब वह सुस्त होकर नीचे बैठ गया तो उसे अपने स्टाफ के हवाले कर दिया, जिसने आगे ग्रूमिंग की प्रक्रिया पूरी की.
अनुभव का आरोप है कि इंजेक्शन लगाने से पहले न तो उनसे लिखित सहमति ली गई और न ही दवा का नाम या उसके संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई. बाद में जानकारी जुटाने पर उन्हें पता चला कि कथित तौर पर जिस इंजेक्शन का इस्तेमाल किया गया, वह सामान्य ग्रूमिंग के लिए नहीं बल्कि ऑपरेशन के दौरान बेहोश करने (एनेस्थीसिया) के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा थी. उनका दावा है कि इसकी अधिक मात्रा जानलेवा साबित हो सकती है और उनके मामले में भी यही हुआ. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अदालत या जांच एजेंसियों द्वारा अभी नहीं हुई है.
कुछ घंटों में बिगड़ी तबीयत, हो गई मौत
अनुभव के मुताबिक, घर लौटने के कुछ ही समय बाद जॉनी की तबीयत बिगड़ने लगी. उसे बेचैनी, सुस्ती और उल्टियां होने लगीं. फिर कुछ घंटों के भीतर उसकी मौत हो गई. अनुभव और उनकी पत्नी ज्योति सिंह के लिए जॉनी सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य और बच्चे जैसा था. उसकी मौत के बाद दोनों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया.
अनुभव परिहार ने पहले पुलिस, कमिश्नर और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की. उनका आरोप है कि शुरुआत में मामले को यह कहते हुए बंद करने की कोशिश की गई कि किसी तरह की लापरवाही नहीं हुई. पेशे से वकील होने के कारण उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाया और सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत करीब 350 आरटीआई दाखिल कीं. उनका कहना है कि लगातार शिकायतें लिखते-लिखते अब तक करीब 5000 पन्नों का रिकॉर्ड तैयार हो चुका है. इन्हीं दस्तावेजों और आरटीआई से मिली जानकारियों के आधार पर कई अहम तथ्य सामने आए.
अनुभव के मुताबिक, आरटीआई से मिली जानकारी में पता चला कि जिस जगह डॉग केयर सेंटर संचालित हो रहा था, वह वास्तव में मेडिकल स्टोर के रूप में पंजीकृत था. उनका दावा है कि वहां वेटरनरी प्रैक्टिस की जा रही थी, जबकि नियमों के अनुसार मेडिकल स्टोर पर इस तरह की प्रैक्टिस की अनुमति नहीं है. मामले की जांच के लिए कमिश्नर की ओर से तीन सदस्यीय समिति गठित की गई. जांच रिपोर्ट के आधार पर ड्रग्स विभाग ने मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी रद्द कर दिया. इसके बावजूद, अनुभव का आरोप है कि संचालक दूसरी जगह नया सेंटर खोलकर काम करता रहा, जिसके बाद उन्होंने अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखी.
लड़ाई में बिगड़ी सेहत, मिलीं धमकियां
अनुभव परिहार का कहना है कि जॉनी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई आसान नहीं रही. लगातार भागदौड़ और मानसिक तनाव के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई और वह हार्ट पेशेंट बन गए। परिवार ने कई बार उन्हें यह लड़ाई छोड़ने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें डराने, धमकाने और अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी देने की भी कोशिश की गई. इसके बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी.
अनुभव की पत्नी ज्योति सिंह का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ उनके पालतू डॉग जॉनी के लिए नहीं, बल्कि उन सभी मूक जानवरों के लिए है जो इंसानों की लापरवाही का शिकार बनते हैं. उनका कहना है कि ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े.
फिलहाल यह मामला जिला उपभोक्ता आयोग, जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय में लंबित है. अनुभव परिहार का कहना है कि प्रयागराज विकास प्राधिकरण द्वारा डॉग केयर सेंटर को सील किया जाना उनकी लंबी लड़ाई की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन जॉनी को असली इंसाफ तभी मिलेगा, जब अदालत दोषियों को सजा सुनाएगी.
आनंद राज