यूपी के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य दंडी संन्यासी प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की अर्जी खारिज कर दी गई है. इलाहाबाद के विशेष पॉक्सो जज की कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की. अदालत ने अर्जी को कुछ निर्देशों के साथ खारिज करते हुए मामले का निपटारा कर दिया.
दरअसल, प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद ने आशुतोष ब्रह्मचारी समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी. उन्होंने कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी. उनका कहना था कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. हालांकि, अदालत ने सीधे नई FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दिया.
स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता के पास आरोपित आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ जो भी सबूत हैं, उन्हें जांच अधिकारी को सौंपा जाए. सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए.
याचिकाकर्ता को अपने सभी दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जांच अधिकारी को देने होंगे. डिजिटल और फिजिकल सबूत भी सौंपे जा सकते हैं. जांच अधिकारी इन सबूतों का इस्तेमाल जांच की जरूरत के अनुसार कर सकते हैं.
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पुराने मुकदमे की जांच में सबूत शामिल होंगे
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत और सबूत झूंसी थाने में दर्ज पुराने मुकदमे में दे सकते हैं. दरअसल, यह मामला केस नंबर 58/2026 से जुड़ा है. इस मामले की जांच पहले से चल रही है.
कोर्ट ने साफ किया कि उपलब्ध सबूतों को जांच में शामिल करने का फैसला जांच अधिकारी करेंगे. जांच अधिकारी मामले की जरूरत के हिसाब से इन सबूतों की जांच कर सकते हैं. इसके लिए याचिकाकर्ता को सभी संबंधित सामग्री जांच अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी.
कोर्ट ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट को भी निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि झूंसी पुलिस पुराने मुकदमे की जांच आगे बढ़ाए. जांच के दौरान उपलब्ध सभी प्रासंगिक सबूतों पर भी ध्यान दिया जाए. अदालत ने यह भी साफ किया कि जांच अधिकारी अदालत की टिप्पणियों से प्रभावित नहीं होंगे. कोर्ट की टिप्पणियों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष नहीं माना जाएगा.
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जांच अधिकारी को स्वतंत्र रूप से पूरे मामले की जांच करनी होगी. जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए. जो भी सबूत सामने आएं, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है.
प्रक्चैतन्य मुकुंदानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्र ने अदालत के आदेश की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अदालत ने आशुतोष ब्रह्मचारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग वाली अर्जी का निपटारा कर दिया है. हालांकि, अदालत ने जांच का रास्ता खुला रखा है. याचिकाकर्ता अब अपने पास मौजूद सबूत जांच अधिकारी को दे सकते हैं. पुलिस उन सबूतों की जांच करेगी.
संजय शर्मा