मऊ दंगा गैंगरेप के सभी 15 आरोपियों को CBI कोर्ट ने किया बरी, 18 साल बाद आया फैसला, वकील बोले- मुख्तार अंसारी ने फंसाया था

यूपी के मऊ में 18 साल पहले हुए दंगे के बीच गैंगरेप की घटना को लेकर केस दर्ज हुआ था. इस मामले में 15 लोग नामजद थे. लखनऊ में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. इस दौरान वकील ने कहा कि यह फर्जी केस मुख्तार अंसारी के इशारे पर दर्ज हुआ था.

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Court. Court.

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 22 अक्टूबर 2023,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

उत्तर प्रदेश के मऊ में 18 साल पहले हुए दंगों के दौरान गैंगरेप की घटना में शामिल सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है. सीबीआई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है. बता दें कि मऊ में हुए दंगों के दौरान गैंगरेप की घटना सामने आई थी, इसमें 15 लोग नामजद थे. कल देर शाम लखनऊ सीबीआई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

जानकारी के अनुसार, 14 अक्टूबर 2005 को भारत मिलाप कार्यक्रम के दौरान मऊ में दंगा भड़क गया था. आरोप लगा था कि तत्कालीन विधायक मुख्तार अंसारी के इशारे पर गैंगरेप का फर्जी केस मऊ कोतवाली में दर्ज कराया गया था. इस मामले में 4 अक्टूबर 2010 को सीबीआई ने 15 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी.

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कोर्ट में बहस के दौरान वकील ने कहा कि गैंगरेप की शिकार हुई नाबालिग पीड़िता का इलाज घटना के एक हफ्ते बाद कराया गया, वहीं अन्य महिलाओं का मेडिकल घटना के डेढ़ माह बाद कराया गया. इसी के साथ घटना में चाचा भतीजे व 65 से 70 साल के बुजुर्गों को भी आरोपी बनाया गया.

साल 2005 में मऊ में हुआ था भीषण दंगा, रेलवे को ट्रेन तक बंद करनी पड़ी थी

इस मामले की सुनवाई लखनऊ सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में हुई. कल देर शाम सुनवाई के बाद मऊ दंगे के दौरान गैंगरेप के सभी 15 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है. बता दें कि साल 2005 में मऊ जिले में काफी भीषण दंगा हुआ था. इस दंगे में लगभग एक महीने तक मऊ जलता रहा था. दंगे की आग इतनी भीषण थी कि इतिहास में पहली बार रेलवे ने मऊ से अपना संचालन बंद कर दिया था. दंगे में एक दर्जन से अधिक लोग मारे गए थे. सैकड़ों दुकानें और घर जला दिए गए थे. 

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