लखनऊ अग्निकांड: 15 जिंदगियां लीलने वाली बिल्डिंग का पुराना सच आया सामने, 2016 में जारी हुआ था डिमोलिशन आदेश

लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद इमारत से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जांच में पता चला है कि बिल्डिंग के खिलाफ 2016 में डिमोलिशन आदेश जारी हुआ था, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया. अब बिल्डिंग की स्वीकृतियों, निर्माण और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है.

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 इमारत का पुराना रिकॉर्ड आया सामने. (Photo- PTI) इमारत का पुराना रिकॉर्ड आया सामने. (Photo- PTI)

आशीष श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

लखनऊ के अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में एक इमारत में लगी भीषण आग ने पूरे शहर को झकझोर दिया है. इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. सभी मृतकों की उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है. आग जिस इमारत में लगी, वहां ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप और ऊपरी हिस्से में एनिमेशन सेंटर संचालित था. हादसे के बाद अब इमारत से जुड़े कई पुराने रिकॉर्ड और कानूनी दस्तावेज सामने आ रहे हैं.

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जांच के दौरान पता चला है कि अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का इतिहास कई बदलावों और कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़ा रहा है. जानकारी के अनुसार यह बिल्डिंग साल 1980 में लॉटरी के जरिए से आवंटित किया गया था. इसके बाद साल 2005 में इसका विक्रय विलेख विजय कुमार और उषा के पक्ष में निष्पादित हुआ. बाद में वर्ष 2013 में यह भवन वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया गया था. लखनऊ विकास प्राधिकरण ने 7 अगस्त 2014 को नए स्वामियों के नाम भवन का नामांतरण कर दिया था. रिकॉर्ड के अनुसार भवन का कुल क्षेत्रफल 1992 वर्गफुट है और इसके लिए 20 अगस्त 2014 को आवासीय मानचित्र स्वीकृत किया गया था.

बता दें, इस भीषण अग्निकांड मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना अलीगंज में बीएनएस की विभिन्न धाराओं और उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम के तहत छह नामजद आरोपियों समेत अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशांक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है. मामले में अन्य आरोपियों की तलाश और आगे की जांच जारी है.

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2016 में जारी हुआ था ध्वस्तीकरण आदेश

इमारत को लेकर सबसे बड़ा खुलासा साल 2016 से जुड़ा है. प्राधिकरण ने भवन के खिलाफ अनाधिकृत निर्माण के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था. मामले की सुनवाई के बाद विहित प्राधिकारी ने 10 मई 2016 को भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश पारित कर दिया था. हालांकि बाद में भवन स्वामियों ने इस आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई. उनका कहना था कि उन्हें सुनवाई का पर्याप्त अवसर नहीं मिला और निर्माण स्वीकृत मानचित्र के अनुरूप था. इसके बाद 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश निरस्त कर दिया गया था.

अब सुरक्षा मानकों की जांच

अग्निकांड के बाद प्रशासन भवन की स्वीकृतियों, निर्माण की स्थिति और सुरक्षा मानकों की विस्तृत जांच कर रहा है. अधिकारियों की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि भवन में सभी आवश्यक नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं.

पोस्टमार्टम गृह में पसरा मातम

हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन पोस्टमार्टम गृह पहुंच रहे हैं. मृतकों में शामिल अब्दुल रहमान और सुखमनी के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. पोस्टमार्टम गृह में मातम का माहौल है और हर तरफ दुख और सन्नाटा पसरा हुआ है.

परिजनों की आंखों से लगातार आंसू बह रहे हैं. अपने प्रियजनों को खोने का दर्द उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रहा है. हादसे के बाद परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. प्रशासन की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं.

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15 मौतों के बाद उठे कई सवाल

इस हादसे ने भवन सुरक्षा, निर्माण नियमों और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस भवन के खिलाफ एक समय डिमोलिशन आदेश तक जारी हो चुका था, उसी इमारत में हुए इस अग्निकांड ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है. फिलहाल प्रशासन सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच कर रहा है. भवन के निर्माण, स्वीकृतियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
 

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