उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड मामले में पुलिस और प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. इस भीषण हादसे में 15 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद पुलिस ने बिल्डिंग और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के मालिक वीरेंद्र शुक्ला को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है.
गिरफ्तारी के बाद कानून के शिकंजे से बचने के लिए आरोपी वीरेंद्र शुक्ला ने बीमारी का बहाना बनाया. उसने पुलिस हिरासत में अचानक सीने में तेज दर्द होने की बात कही. आरोपी ने खुद को दिल की गंभीर बीमारी होने का बहाना बनाया ताकि उसे जेल की जगह अस्पताल भेज दिया जाए.
आरोपी की शिकायत के बाद पुलिस ने उसे जांच के लिए डॉक्टरों के पास भेजा. डॉक्टरों ने वीरेंद्र शुक्ला की जांच की और इसके बाद उसे पूरी तरह 'फिट' करार दिया.
देर रात अदालत में पेशी
अस्पताल से फिट घोषित किए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी वीरेंद्र शुक्ला को देर रात चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया. अदालत में मामले की गंभीरता और 15 लोगों की मौत के पहलुओं पर विचार किया गया. इसके बाद मजिस्ट्रेट ने आरोपी वीरेंद्र शुक्ला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का फैसला सुनाया.
तीन आरोपी पहले ही भेजे गए जेल
लखनऊ अग्निकांड को लेकर पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस अग्निकांड में वीरेंद्र शुक्ला के अलावा कई और लोग भी नामजद हैं. इस मामले में पुलिस ने पहले ही तीन नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था.
बिल्डिंग पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी
अलीगंज अग्निकांड की अवैध बिल्डिंग पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी की जा रही है. एलडीए ने बिल्डिंग के मालिकों को नोटिस जारी किया है. 20 अगस्त 2014 को रेसिडेंशियल होम का नक्शा पास करवाकर इस बिल्डिंग को बनाया गया था. लेकिन इसमें कमर्शिंयल वर्क हो रहा था. अब बिल्डिंग के मालिकों से 15 दिन में इस पर जवाब मांगा गया है. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो इमारत पर बुलडोजर एक्शन होगा.
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मृतक के परिवारों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया था. राज्य सरकार ने हर मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता दी गई है. विधायक नीरज बोरा ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर पीड़ित परिवारों को ये आर्थिक सहायता सौंपी.
संतोष शर्मा