लखनऊ में कांग्रेस के 'जूता कांड' की जांच के तहत बयान दर्ज किए गए हैं. कांग्रेस नेता ममता चौधरी ने जांच समिति के सामने अपना पक्ष रखा है, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने समिति को लिखित जवाब भेजा है.
यह विवाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा मोना के पदभार समारोह से पहले हुआ था. इस दौरान अजय राय और ममता चौधरी के बीच विवाद हुआ था. विवाद बढ़ने पर कुछ लोगों ने एक-दूसरे पर जूते-चप्पल चलाए थे.मामले की जांच के लिए राजेंद्र पाल गौतम ने पांच सदस्यीय समिति बनाई थी. बृजलाल खाबरी की अध्यक्षता वाली यह समिति जल्द ही अपनी जांच रिपोर्ट सौंपेगी.
11 अक्टूबर को हुए प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अजय राय अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस कार्यालय पहुंचे थे. भीड़ को देखते हुए उनके समर्थकों ने कहा कि 'अध्यक्ष जी निकलेंगे, रास्ता दे दीजिए.' इस पर ममता चौधरी की तरफ से 'कौन अध्यक्ष?' पूछे जाने के बाद विवाद बढ़ गया. इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच झड़प हुई.
क्या है मामला
आरोप है कि अजय राय के कांग्रेस मुख्यालय पहुंचने पर ममता चौधरी की तरफ से उनके खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया. इसके बाद अजय राय के समर्थकों ने ममता चौधरी के खिलाफ विरोध जताया और कुछ समर्थक हाथों में जूते लेकर पहुंच गए. मामले को लेकर अजय राय ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद से शिकायत की थी. उन्होंने ममता चौधरी को पार्टी से बाहर करने की मांग की थी और कहा था कि ऐसे विवादों से पार्टी की छवि खराब हो रही है. उन्हें कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था.
वहीं, ममता चौधरी ने पूरे घटनाक्रम पर सफाई देते हुए कहा था कि उस समय उन्हें समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा था. उन्होंने बताया कि महिला कांग्रेस की बड़ी संख्या में महिलाएं आराधना मिश्रा 'मोना' के स्वागत के लिए खड़ी थीं. बाद में उन्हें पता चला कि आराधना मिश्रा और अजय राय पहुंच चुके हैं. लोगों के कहने पर महिलाएं एक तरफ हट गई थीं.
आशीष श्रीवास्तव