धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में दीपावली का पर्व बेहद खास अंदाज में मनाया जाता है. यहां दीपावली सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पांच दिनों तक चलने वाला महोत्सव है. इस दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में भक्तों के बीच लाखों रुपये का खजाना बांटा जाता है. इस बार मंदिर प्रबंधन ने करीब 8 से 10 लाख रुपये के सिक्के वितरित करने की तैयारी की है.
मंदिर में धनतेरस से अन्नकूट महोत्सव तक मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन किए जा सकेंगे. इस दौरान करीब 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है. भक्त यहां से प्रसाद के साथ मां का खजाना भी अपने घर लेकर जाएंगे. इसमें अलग-अलग धातुओं के सिक्के शामिल होते हैं.
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मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा के दरबार से मिलने वाले इस खजाने को घर में रखने से कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती. परिवार में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है. यही वजह है कि हर साल देश के अलग-अलग हिस्सों से लाखों श्रद्धालु इस अनोखी परंपरा का हिस्सा बनने काशी पहुंचते हैं.
धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय स्वर्णमयी दर्शन महोत्सव
इस बार धनतेरस पर विशेष शुभ योग बनने की बात कही जा रही है. मान्यता के अनुसार, इस दिन देश में समृद्धि रहेगी और कोष भरा रहेगा. इसी अवसर पर अभिजीत मुहूर्त के भोर में मां अन्नपूर्णा का विधि-विधान से पूजन और आरती की जाएगी. इसके बाद खजाने और 21 किलो के रजत खजाने का पूजन होगा.
मंदिर में साल में केवल पांच दिनों के लिए मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होते हैं. इस बार 6 नवंबर को धनतेरस के दिन सुबह 5 बजे से रात 11:30 बजे तक स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन और खजाना वितरण होगा. मंदिर बंद होने तक श्रद्धालु इस खजाने को प्राप्त कर सकेंगे.
इसके बाद 6 नवंबर से 10 नवंबर तक प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 11:15 बजे तक भगवती अन्नपूर्णा के दर्शन किए जा सकेंगे. पांचवें दिन यानी 10 नवंबर को अन्नकूट महोत्सव आयोजित होगा. इस दिन मंदिर में लड्डुओं की भव्य झांकी सजाई जाएगी और रात 11:30 बजे मां की महाआरती होगी. इसके बाद एक साल के लिए स्वर्णमयी अन्नपूर्णा का कपाट बंद कर दिया जाएगा.
आठ प्रकार की धातुओं के सिक्के बनेंगे भक्तों के लिए खजाना
प्राचीन अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकरपुरी ने बताया कि धनतेरस की सुबह मां अन्नपूर्णा के स्वर्णिम दर्शन शुरू होंगे. दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को खजाना वितरित किया जाएगा. मंदिर के प्रथम तल पर पहुंचने वाले भक्तों को सबसे पहले मां के प्रसाद स्वरूप लावा मिलेगा. इसके बाद खजाना दिया जाएगा और फिर श्रद्धालु स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन कर सकेंगे.
महंत के मुताबिक, धनतेरस के दिन सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक मां का खजाना बांटा जाएगा. इसके बाद लगातार चार दिनों तक दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा. पांचवें दिन अन्नकूट महोत्सव में मां को 100 प्रकार के व्यंजन, मिठाइयां और कच्चे भोग अर्पित किए जाएंगे. पूजा के बाद इन सभी प्रसादों को श्रद्धालुओं में वितरित कर दिया जाएगा.
उन्होंने बताया कि खजाने के रूप में आठ प्रकार की धातुओं के सिक्के दिए जाते हैं. इनमें प्रचलन में मौजूद मुद्रा के साथ पुराने और चलन से बाहर हो चुके सिक्के भी शामिल रहते हैं. इस बार करीब 8 से 10 लाख रुपये मूल्य के सिक्के श्रद्धालुओं में बांटने की तैयारी है. मंदिर प्रबंधन को उम्मीद है कि इस आयोजन में 8 से 10 लाख भक्त पहुंचेंगे.
बाबा विश्वनाथ और मां अन्नपूर्णा से जुड़ी है परंपरा
महंत शंकरपुरी ने बताया कि मां अन्नपूर्णा के खजाने का वितरण प्राचीन परंपरा का हिस्सा है. इसके पीछे मान्यता है कि बाबा विश्वनाथ ने मां अन्नपूर्णा से प्रसाद मांगा था. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हर साल पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव आयोजित किया जाता है.
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां के दरबार से मिला खजाना और भोग घर ले जाने से परिवार में बरकत बनी रहती है. यही कारण है कि लोग इन सिक्कों को श्रद्धा के साथ अपने घरों में संभालकर रखते हैं. धनतेरस से अन्नकूट तक मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है.
मंदिर पहुंचने और बाहर निकलने का रास्ता
मंदिर प्रबंधन के मुताबिक, श्रद्धालुओं को बांसफाटक से होते हुए गेट नंबर एक, ढुंढिराज की ओर से मंदिर पहुंचना होगा. वहां बनाई गई अस्थायी सीढ़ियों के रास्ते स्वर्णमयी मां अन्नपूर्णा के दर्शन किए जा सकेंगे. दर्शन और खजाना प्राप्त करने के बाद भक्त कालिका गली की ओर से बाहर निकलेंगे.
इस तरह पांच दिनों तक चलने वाला यह आयोजन काशी की दीपावली को खास बना देता है. जहां एक ओर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णिम दर्शन का अवसर मिलता है, वहीं दूसरी ओर लाखों श्रद्धालु उनके आशीर्वाद के प्रतीक के रूप में खजाना लेकर अपने घर लौटते हैं.
रोशन जायसवाल