दाल हो, सब्जी हो या रात का दूध... हल्दी शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां रोज इस्तेमाल न होती हो. लेकिन अगर यही हल्दी असली नहीं, बल्कि चावल के टूटे दानों में रंग मिलाकर तैयार की गई हो, तो? कानपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई ने यही सवाल सबके सामने खड़ा कर दिया है. कानपुर के पनकी की एक मसाला फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान अधिकारियों को ऐसे सुराग मिले हैं, जहां हल्दी के नाम पर रंग मिला चावल पीसकर पाउडर बनाया जा रहा था. मौके से करीब 5.86 लाख रुपये का संदिग्ध स्टॉक जब्त किया गया है. अब पूरे मामले की सच्चाई लैब रिपोर्ट बताएगी.
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की टीम जब पनकी के इस्पात नगर स्थित पीतांबरा इंटरप्राइजेज पहुंची तो फैक्ट्री में मसालों का उत्पादन जारी था. मशीनें चल रही थीं और हल्दी पाउडर तैयार किया जा रहा था. लेकिन जांच आगे बढ़ी तो अधिकारियों के सामने ऐसा तथ्य आया, जिसने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया. जिस फैक्ट्री में हल्दी पाउडर तैयार हो रहा था, वहां साबुत हल्दी मौजूद ही नहीं थी. इसकी जगह बड़ी मात्रा में चावल के टूटे हुए दाने (ब्रोकन राइस), लिक्विड कलर और अन्य कच्चा माल रखा मिला. यहीं से अधिकारियों को शक हुआ कि कहीं हल्दी के नाम पर रंग मिला चावल पीसकर तो बाजार में नहीं बेचा जा रहा.
एक सवाल जिसने जांच की दिशा बदल दी
छापेमारी के दौरान अधिकारियों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि जब फैक्ट्री में साबुत हल्दी नहीं है, तो आखिर हल्दी पाउडर तैयार कैसे किया जा रहा है? यही सवाल अब जांच का सबसे अहम बिंदु बन गया है. मौके से मिली सामग्री और उत्पादन प्रक्रिया को देखते हुए टीम ने तत्काल नमूने एकत्र किए और पूरे स्टॉक को जांच के दायरे में ले लिया. एफएसडीए की टीम ने सिर्फ हल्दी पाउडर का सैंपल नहीं लिया. जांच को व्यापक बनाने के लिए कुल छह नमूने एकत्र किए गए हैं. इनमें शामिल हैं हल्दी पाउडर, हल्दी में इस्तेमाल होने वाला लिक्विड कलर, चावल के टूटे हुए दाने, मिर्च पाउडर, मिर्च में इस्तेमाल होने वाला रंग और धनिया पाउडर. इन सभी नमूनों को खाद्य प्रयोगशाला भेज दिया गया है. अब रिपोर्ट से साफ होगा कि मसाले खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप हैं या उनमें मिलावट की गई है.
77 बोरी चावल के टुकड़े... आखिर इस्तेमाल किसलिए
कार्रवाई के दौरान बरामद सामग्री ने भी कई सवाल खड़े कर दिए. टीम को फैक्ट्री से 77 बैग चावल के टूटे हुए दाने, 42 बैग हल्दी पाउडर, 30-30 किलो मिर्च और धनिया पाउडर मिला. इन सभी सामान की अनुमानित कीमत करीब 5 लाख 86 हजार 200 रुपये बताई गई है. इतनी बड़ी मात्रा में चावल के टुकड़े और रंग मिलने के बाद विभाग ने पूरे स्टॉक को जब्त कर लिया, ताकि जांच पूरी होने तक कोई भी संदिग्ध उत्पाद बाजार तक न पहुंच सके.
फैक्ट्री के लाइसेंस पर भी कार्रवाई
छापेमारी के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने संबंधित फर्म का लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह के मुताबिक, अगर लैब रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि होती है तो संबंधित फर्म के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम और रोजमर्रा की खाद्य सामग्री में मिलावट रोकने के लिए विभाग लगातार अभियान चला रहा है और आगे भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे.
क्यों खतरनाक है मसालों में मिलावट
हल्दी भारतीय रसोई का ऐसा मसाला है, जिसका इस्तेमाल लगभग हर घर में रोज होता है. यही वजह है कि इसमें किसी भी तरह की मिलावट सीधे लाखों लोगों की सेहत से जुड़ जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य पदार्थ में अनधिकृत रंग या घटिया सामग्री मिलाने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसलिए किसी भी संदिग्ध उत्पाद की पुष्टि केवल वैज्ञानिक जांच के बाद ही की जाती है. इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी नमूनों को लैब भेजा है. बाजार में कई बार कम कीमत पर मसाले बेचकर ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है. कई लोग खुले मसाले या बिना ब्रांड वाले उत्पाद सिर्फ सस्ते होने की वजह से खरीद लेते हैं.
ऐसे मामलों में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा भरोसेमंद और लाइसेंस प्राप्त ब्रांड का मसाला खरीदें. पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें. बहुत कम कीमत वाले मसालों से सतर्क रहें. बिना बिल के खुला मसाला खरीदने से बचें. यदि किसी मसाले का रंग, गंध या स्वाद असामान्य लगे तो उसका उपयोग न करें. खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं मिलावटी खाद्य पदार्थ बनाए या बेचे जाने की जानकारी मिले तो उसकी सूचना विभाग को दें. उपभोक्ताओं की सतर्कता से ही ऐसे कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है.
सिमर चावला