उत्तर प्रदेश के एटा के एक गांव में डेंगू और बुखार से लगातार हो रही मौतों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब एक महीने में 18 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. बुधवार को भी दो लोगों की मौत होने की बात सामने आई. लगातार मौतों के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है.
ग्रामीणों के मुताबिक, मरने वालों में बड़ी संख्या जवान लोगों की है. हालात ऐसे हैं कि डेंगू के डर से कुछ परिवार गांव छोड़कर रिश्तेदारों के यहां शरण लेने को मजबूर हो गए हैं. लोगों का आरोप है कि इतनी मौतों के बावजूद सरकारी स्तर पर प्रभावी इंतजाम नहीं किए गए.
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मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने गांव में डॉक्टरों की टीम भेजी है और मेडिकल कैंप लगाया गया है. यहां बुखार समेत दूसरी बीमारियों से पीड़ित लोगों की जांच कर दवाएं दी जा रही हैं. हालांकि, ग्रामीण इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं. उनका आरोप है कि कैंप में महज एक-दो गोलियां देकर खानापूर्ति की जा रही है.
सरकारी जांच पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप डेंगू की जांच को लेकर है. उनका कहना है कि सरकारी कैंप में कराई गई जांच में रिपोर्ट निगेटिव आती है, जबकि निजी अस्पताल में जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हो रही है. इसी मुद्दे को लेकर लोगों में स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ खासा आक्रोश है.
आजतक की टीम जब गांव के जीरो पॉइंट पर पहुंची और ग्रामीणों से बातचीत की, तो उनका दर्द और गुस्सा दोनों सामने आया. लोगों ने जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. ग्रामीणों का कहना है कि मौतों का सिलसिला जारी रहने के बावजूद बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए.
वहीं, जिला प्रशासन ग्रामीणों के दावे से अलग 12 मौतों की बात कह रहा है. सीडीओ राजेंद्र मिश्रा के मुताबिक, मृतकों में 4 से 5 बुजुर्ग शामिल हैं. उनका कहना है कि सभी मौतों को डेंगू से जोड़ना सही नहीं होगा, क्योंकि कुछ लोगों की जान अन्य बीमारियों की वजह से भी गई है.
दूषित पानी से बचने की अपील
जिला प्रशासन गांव में लोगों को जागरूक कर रहा है कि दूषित पानी से दूर रहें और पानी को उबालकर ही पिएं. अधिकारियों ने दूषित जलस्रोत वाले नलों को चिन्हित किया है और ग्रामीणों से इनका पानी इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है. प्रशासन की ओर से बीमारी की वजह और मौतों के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है.
स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल कैंप में मरीजों की जांच और इलाज जारी है, लेकिन ग्रामीणों का भरोसा अभी पूरी तरह नहीं लौट पाया है. अधिकारियों के गांव पहुंचने पर लोगों का सब्र भी टूट गया और उन्होंने उनके सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. ग्रामीण बीमारी से जल्द राहत और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गांव में लगातार हो रही मौतों की असली वजह क्या है. क्या ये सभी मौतें डेंगू की वजह से हुई हैं या इसके पीछे दूसरी बीमारियां और दूषित पानी भी जिम्मेदार हैं? ग्रामीणों को इस सवाल के स्पष्ट जवाब और बीमारी पर पुख्ता नियंत्रण का इंतजार है.
देवेश पाल सिंह