दिल्ली की जामा मस्जिद के पूर्व शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने मुजफ्फरनगर के एक कोर्ट में सरेंडर किया. यह मामला 19 साल पुराना है और चुनाव प्रचार के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन से जुड़ा है.
चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कविता अग्रवाल ने मौलाना बुखारी को जमानत दे दी, जब उन्होंने 20-20 हजार रुपये की दो जमानत राशि जमा की. इस मामले में कोर्ट में बार-बार पेश न होने के कारण बुखारी के खिलाफ जमानत-योग्य वारंट जारी किए गए थे.
अभियोजन अधिकारी केसी मौर्य ने एक न्यूज एजेंसी को बताया कि बुखारी और अन्य लोगों के खिलाफ 10 अप्रैल 2007 को खतौली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था.
यह मामला तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 171 (सरकारी कर्मचारी का रूप धारण करना) और 188 (सरकारी कर्मचारी के वैध आदेश की अवज्ञा) के तहत दर्ज किया गया था.
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बुखारी हेलीकॉप्टर से खतौली पहुंचे थे और जरूरी अनुमति लिए बिना एक जनसभा को संबोधित किया था, जिससे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हुआ.
मौर्य ने कहा कि उल्लंघन के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था और बार-बार समन और जमानत-योग्य वारंट जारी होने के बावजूद बुखारी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे.
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