समय बदल रहा है और इसके साथ परिवारों में रिश्तों का रूप भी बदलता जा रहा है. कभी एक ही छत के नीचे पूरा परिवार साथ रहता था, लेकिन अब कई परिवारों में रिश्तों के बीच दूरी बढ़ती दिखाई देती है. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद क्षेत्र से सामने आई एक बुजुर्ग दंपति की कहानी इसी बदलते रिश्ते की दर्दनाक तस्वीर पेश करती है. यह कहानी 75 वर्षीय बुजुर्ग पति और उनकी 70 वर्षीय पत्नी सत्यवती की है. दोनों के चार बेटे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आमतौर पर पति-पत्नी चाहते हैं कि वो अपने बच्चों के साथ रहें और बाकी जिंदगी हंसी-खुशी गुजारें. लेकिन इस बुजुर्ग दंपति की जिंदगी में ऐसा नहीं हुआ. पति-पत्नी के बीच बच्चों को लेकर विवाद हुआ और धीरे-धीरे दोनों अलग-अलग रहने लगे.
सिकंदराबाद के एक गांव में रहने वाले इस दंपति के चार बेटे हैं. विवाद यह था कि पिता जिन बेटों के साथ रहना चाहते थे, मां उनके साथ नहीं रहना चाहती थीं. वहीं जिन बेटों के साथ मां रहना चाहती थीं, उनके साथ पिता रहने को तैयार नहीं थे. आखिरकार स्थिति ऐसी बनी कि दो बेटे मां के साथ रहने लगे और दो बेटे पिता के साथ. इस तरह एक ही परिवार में माता-पिता का बंटवारा हो गया. पिता सबसे बड़े और सबसे छोटे बेटे के साथ रहने लगे, जबकि दोनों बीच के बेटे अपनी मां सत्यवती के साथ रहने लगे. समय के साथ पति-पत्नी के बीच दूरी बढ़ती चली गई. दोनों के बीच कई बार विवाद हुआ. मामला पिटाई तक पहुंचा और विवाद थाने तक भी पहुंच गया. इससे पति और नाराज हो गए. इसके बाद वह अपनी पत्नी और दोनों बीच के बेटों से भी मिलना-जुलना छोड़कर अपने साथ रहने वाले बेटों के पास रहने लगे.
बुढ़ापे में पत्नी को इलाज और गुजारे की चिंता
अलग-अलग रहने के कारण पति-पत्नी के बीच दूरियां और बढ़ती गईं. इसी बीच 70 वर्षीय सत्यवती की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ीं. उनके साथ रहने वाले दोनों बेटों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे अपनी मां का बेहतर तरीके से इलाज करा सकें और उनके खर्च को संभाल सकें. ऐसे में सत्यवती को अपने पति की ओर देखना पड़ा. उन्हें इलाज और रोजमर्रा के खर्च के लिए आर्थिक मदद की जरूरत थी. उन्होंने पति से मदद मांगी और यह भी कहा कि पत्नी के गुजारे के लिए पति की जिम्मेदारी होती है. इसी शिकायत के बाद मामला पुलिस के मीडिया सेल तक पहुंचा. शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने बुजुर्ग दंपति को बुलाया. काउंसलर्स ने दोनों से बातचीत की और कोशिश की कि पति-पत्नी के बीच पुराना विवाद खत्म हो तथा दोनों फिर से साथ रह सकें.
महिला सेल के काउंसलर्स ने बुजुर्ग पति-पत्नी को काफी समझाया. कोशिश यह भी की गई कि चारों बेटे और दोनों माता-पिता एक साथ रहें. लेकिन कई साल से चले आ रहे विवाद और रिश्तों में आई दूरी के कारण बात नहीं बन सकी. दोनों के बीच रिश्ते की दरार इतनी गहरी हो चुकी थी कि पति और पत्नी दोनों ही अब एक साथ रहने के लिए तैयार नहीं हुए. ऐसे में काउंसलिंग के दौरान एक दूसरे विकल्प पर सहमति बनाने की कोशिश की गई. आखिरकार पुलिस की मध्यस्थता से बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को हर महीने गुजारा भत्ता देने पर सहमत हो गए. तय हुआ कि वह पत्नी सत्यवती को हर महीने ₹5000 देंगे, जिससे वह अपना गुजारा कर सकें.
महिला सेल की प्रभारी अलका चौधरी ने बताया कि बुजुर्ग पति को काफी समझाया गया और उनकी पत्नी को भी समझाया गया. इसके बाद पति पत्नी को ₹5000 प्रति माह देने के लिए तैयार हो गए. अलका चौधरी के मुताबिक, फिलहाल 15 दिन बीत चुके थे, इसलिए आगामी 15 दिनों के लिए ₹2700 दिए गए हैं. अगले महीने से बुजुर्ग पति अपनी पत्नी को ₹5000 हर महीने देने के लिए तैयार हैं. इस तरह पति-पत्नी को दोबारा एक साथ लाने की कोशिश भले ही सफल नहीं हो सकी, लेकिन पुलिस और महिला सेल की काउंसलिंग के बाद पत्नी के गुजारे के लिए आर्थिक मदद का रास्ता निकल आया.
साल 2003 में आई फिल्म 'बागबान' में बुजुर्ग माता-पिता और उनके चार बेटों के बीच रिश्तों की कहानी दिखाई गई थी. उसमें भी बुजुर्ग माता-पिता को बेटों के बीच अलग-अलग रहने की स्थिति का सामना करना पड़ता है. सिकंदराबाद की यह वास्तविक कहानी उससे अलग है. यहां चार बेटों के बीच माता-पिता का बंटवारा हुआ. दो बेटे मां के साथ रहने लगे और दो बेटे पिता के साथ. पति-पत्नी भी एक-दूसरे से अलग हो गए. बुढ़ापे में दोनों अलग-अलग छतों के नीचे रहने को मजबूर हैं. पत्नी की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और आर्थिक जरूरत के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा. महिला सेल की मध्यस्थता से पति ने पत्नी के लिए हर महीने ₹5000 गुजारा भत्ता देने पर सहमति जताई. इसके साथ ही मामले का औपचारिक निस्तारण कर दिया गया.
महिला सेल ने दोनों को समझाने की कोशिश की
महिला सेल प्रभारी अलका चौधरी ने बताया कि दोनों बुजुर्गों को काफी समझाया गया. प्रयास किया गया कि परिवार के सभी सदस्य साथ रहें और पति-पत्नी के बीच विवाद खत्म हो. लेकिन जब दोनों साथ रहने को तैयार नहीं हुए तो गुजारे के लिए आर्थिक मदद पर सहमति बनी. अब सत्यवती को पति की ओर से हर महीने ₹5000 मिलेंगे. फिलहाल 15 दिन के लिए ₹2700 दिए जा चुके हैं. अगले महीने से ₹5000 प्रतिमाह देने पर पति सहमत हुए हैं. पुलिस की मध्यस्थता के बाद इस मामले का औपचारिक निस्तारण कर दिया गया.
मुकुल शर्मा