राम मंदिर के चढ़ावे चोरी की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. सूत्रों के मुताबिक विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी जांच लगभग पूरी कर ली है और करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली गई है. रिपोर्ट में कई ऐसे बिंदु दर्ज किए गए हैं जिनके आधार पर आने वाले दिनों में बड़ी कार्रवाई हो सकती है. सबसे ज्यादा चर्चा उन सेवादारों को लेकर है जिनकी भूमिका जांच के दौरान सवालों के घेरे में आई है. सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट के आधार पर मंदिर से जुड़े कई सेवादारों की सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं. हालांकि अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मंदिर परिसर में कार्रवाई की अटकलों ने हलचल बढ़ा दी है.
जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के सचिव से भी बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई. इस दौरान जांच अधिकारियों ने चढ़ावे के संग्रह, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े कई सवाल पूछे. सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां जांच टीम को मिली हैं, जिन्हें रिपोर्ट का हिस्सा बनाया गया है.
अभी कई सदस्य अयोध्या में ही
भले ही रिपोर्ट तैयार हो चुकी हो, लेकिन SIT की गतिविधियां अभी जारी हैं. जांच टीम के कई सदस्य अभी भी अयोध्या में मौजूद हैं और अंतिम सत्यापन में जुटे हैं. माना जा रहा है कि कुछ बिंदुओं पर अतिरिक्त जानकारी जुटाई जा रही है ताकि रिपोर्ट पूरी तरह तथ्यात्मक और तकनीकी रूप से मजबूत रहे.
चंपत राय को मिलेगी क्लीन चिट या बढ़ेगी मुश्किल?
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में सबसे बड़ा सवाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को लेकर उठ रहा है. मंदिर निर्माण से लेकर उसके संचालन तक जिस व्यक्ति की भूमिका सबसे प्रभावशाली मानी गई, आज वही नाम जांच और बहस के केंद्र में दिखाई दे रहा है. दरअसल, राम मंदिर निर्माण का श्रेय जिन चुनिंदा लोगों को दिया जाता है, उनमें चंपत राय सबसे प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के पूर्णकालिक प्रचारक रहे चंपत राय ने दशकों तक अयोध्या में रहकर राम मंदिर आंदोलन को गति दी. मंदिर आंदोलन के समर्थक उन्हें समर्पित, अनुशासित और सादगीपूर्ण जीवन जीने वाला कार्यकर्ता मानते हैं.
हालांकि उनकी कार्यशैली को लेकर समय-समय पर सवाल भी उठते रहे. अयोध्या के कई संतों और मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरों का आरोप रहा कि ट्रस्ट के गठन और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में अनेक पुराने कार्यकर्ताओं और संतों को अपेक्षित महत्व नहीं मिला. यही वजह है कि ट्रस्ट बनने के बाद से एक वर्ग के भीतर असंतोष लगातार बना रहा. अब जब चढ़ावे से जुड़ा मामला सुर्खियों में है तो वर्षों से दबा असंतोष भी सतह पर दिखाई देने लगा है. कई संत, महंत और आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे खुलकर सवाल उठा रहे हैं. कुछ का कहना है कि यदि मंदिर की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था एक केंद्रीय नेतृत्व के तहत संचालित हो रही थी तो किसी भी गड़बड़ी की जवाबदेही तय होना स्वाभाविक है.
उनकी सादगी आज भी वैसी ही है जैसी पहले थी
यहीं से चंपत राय को लेकर बहस शुरू होती है. उनके समर्थकों का तर्क है कि दशकों के सार्वजनिक जीवन में उन पर व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का कोई आरोप साबित नहीं हुआ और उनकी सादगी आज भी वैसी ही है जैसी पहले थी. दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि यदि जांच में प्रशासनिक कमियां सामने आती हैं तो शीर्ष स्तर की जवाबदेही से इंकार नहीं किया जा सकता. सूत्रों के मुताबिक SIT की रिपोर्ट में विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियों का आकलन किया गया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि रिपोर्ट केवल कुछ कर्मचारियों और सेवादारों तक सीमित रहती है या फिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर भी कोई टिप्पणी करती है.
राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में एक और चर्चा तेजी से चल रही है. माना जा रहा है कि विवाद के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव हो सकते हैं. दान प्रबंधन और प्रशासनिक निगरानी के लिए अधिक प्रोफेशनल सिस्टम लागू करने पर भी विचार किया जा सकता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या SIT रिपोर्ट चंपत राय को पूरी तरह राहत देगी या फिर रिपोर्ट के निष्कर्ष उनके भविष्य को प्रभावित करेंगे. भले ही जांच का अंतिम परिणाम अभी सामने नहीं आया है, लेकिन इतना तय है कि इस विवाद ने राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और नेतृत्व दोनों को गंभीर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है. अब अयोध्या से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक नजर सिर्फ एक बात पर टिकी है—140 पन्नों की रिपोर्ट में आखिर लिखा क्या है और कार्रवाई की गाज किन-किन लोगों पर गिरने वाली है.
कुमार अभिषेक