अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) अपनी फाइनल रिपोर्ट बुधवार 15 जुलाई को सौंप सकता है. एक महीने से अधिक समय पहले गठित तीन सदस्यीय SIT को पहले जांच पूरी करने के लिए समय दिया गया था. इसकी अवधि 15 दिन बढ़ाई गई थी, जो 15 जुलाई को समाप्त हो रही है.
सूत्रों के मुताबिक, SIT अयोध्या दान चोरी मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप सकती है. हालांकि यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या जांच दल रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कुछ और समय मांगता है या तय समयसीमा के भीतर अपनी जांच पूरी कर देता है. रिपोर्ट में चोरी के लिए जिम्मेदारों की पहचान कर जवाबदेही भी तय की जा सकती है.
इसके अलावा मंदिर के डोनेशन मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग सिस्टम में बड़े बदलाव की सिफारिश भी रिपोर्ट का हिस्सा हो सकती है. SIT ने पहले ही कहा है कि जांच के दौरान वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, दस्तावेजी रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, गवाहों और आरोपियों के बयान सहित सभी अहम पहलुओं की जांच की गई है. अंतिम रिपोर्ट पूरी तस्वीर सामने रखेगी.
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट सिर्फ चोरी में शामिल लोगों की पहचान तक सीमित नहीं रहेगी. इसमें उस पूरी जवाबदेही की श्रृंखला की भी जांच होगी, जिसकी वजह से गबन लंबे समय तक बिना पकड़े चलता रहा. जांच में यह भी देखा गया है कि क्या सुपरवाइजरों, कर्मचारियों, दान संग्रह और उसकी गिनती की निगरानी करने वाले अधिकारियों ने तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया था.
क्या संभावित गड़बड़ियों के संकेतों को नजरअंदाज किया गया था. रिपोर्ट में डोनेशन मैनेजमेंट प्रक्रिया के हर चरण की समीक्षा किए जाने की संभावना है. इसमें डोनेशन बॉक्स की कस्टडी, नकदी का परिवहन, गिनती, बैंकिंग, सर्विलांस और ऑडिटिंग तक हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकती है. ये भी जांच किया गया कि क्या निर्धारित SOPs का पालन किया हुआ था.
इसके साथ ही सुपरविजन, डॉक्यूमेंटेशन, एक्सेस कंट्रोल, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और इंटरनल चेक में किसी तरह की कमी ने भक्तों के चढ़ावे को दूसरी जगह भेजे जाने का अवसर तो नहीं दिया. इस बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने अपने इस्तीफे की अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने अपनी सफाई में कई तथ्य पेश किए हैं.
उन्होंने कहा, "मैं पुणे में एक कमरे और किचन वाले घर में रहता हूं. उस घर की एक भी ईंट मेरे नाम पर नहीं है. मेरे इस्तीफे की खबरें पूरी तरह झूठी हैं. मैंने इस्तीफा नहीं दिया है और न ही ऐसा कोई विचार मेरे मन में है. मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का भक्त हूं. मैं युद्ध के मैदान से भागने वालों में नहीं हूं." उधर, इस मामले की वित्तीय जांच भी तेजी से आगे बढ़ रही है.
अयोध्या पुलिस ने गबन किए गए पैसे का पूरा फाइनेंशियल ट्रेल खंगालने, छिपी हुई संपत्तियों की पहचान करने और संभावित लाभार्थियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आयकर विभाग से सहयोग मांगा है. पुलिस फिलहाल गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े करीब 50 बैंक खातों की जांच कर रही है. सभी बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल की जा रही है.
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या चोरी किए गए पैसे को रिश्तेदारों के खातों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया, शेयर बाजार में निवेश किया गया, अचल संपत्ति खरीदी गई या किसी अन्य वित्तीय साधन में लगाया गया. पुलिस ने बैंकों से स्टेटमेंट, KYC रिकॉर्ड, नॉमिनी और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री मांगी है, ताकि पैसों की आवाजाही का नक्शा तैयार किया जा सके.
जांचकर्ता आरोपियों और उनके परिजनों के खातों में हुए कैश डिपॉजिट, बड़ी निकासी, इंटर-अकाउंट ट्रांसफर और निवेश का विश्लेषण कर रहे हैं. इसका उद्देश्य असामान्य संपत्ति या ऐसे वित्तीय लेनदेन की पहचान करना है, जिनकी जानकारी पहले नहीं दी गई थी. आयकर विभाग से यह भी मदद मांगी गई है कि कमाई का हिस्सा कहां-कहां निवेश किया गया हो सकता है.
इसमें इक्विटी मार्केट, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट या रियल एस्टेट शामिल है. यह भी जांच की जा रही है कि क्या कई ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे को छिपाने या उसकी लेयरिंग करने की कोशिश की गई. जांच के दौरान खरीदी गई चल और अचल संपत्तियों की भी पड़ताल हुई है. जांचकर्ताओं को संदेह है कि गबन किया गया पैसा सिर्फ आरोपियों के खातों तक सीमित नहीं होगा.
समर्थ श्रीवास्तव