यूपी में अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी को लेकर विवाद थम नहीं रहा है. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि हो चुकी है. समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेर रहे हैं. अब उन्होंने एसआईटी रिपोर्ट को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं, आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने इशारों में अखिलेश यादव पर निशाना साधा है.
दरअसल, अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गबन को लेकर बनाई गई एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं. आजमगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा, अयोध्या एक आस्था का स्थान है. केवल भारतीयों का नहीं, बल्कि दुनिया में जितने भी सनातनी हैं या हमारे भारत की संस्कृति को समझते हैं, उनके लिए श्रद्धा के भाव के साथ, धार्मिक नगरी होने की वजह से, भावनात्मक जुड़ाव रहा है.
और यह जो खबरें आई हैं और जो जानकारी, सूचनाएं मिल गईं और सरकार को झुक कर के एसआईटी (SIT) बनानी पड़ी. और एसआईटी की रिपोर्ट किसको दी गई? यह भी एक प्रश्नचिह्न है कि एसआईटी बनी और एसआईटी की रिपोर्ट किसको दी गई? और उसके बाद जो कार्रवाई हो रही है, पूरे देश की जनता दुखी है. और जो घटना हुई है, वह बहुत ही निंदनीय है.
'हमारी आस्था के साथ खिलवाड़'
सपा मुखिया ने कहा कि लोगों को पहले भी यही था भावना कि ये धर्म से ज्यादा धन की तरफ ध्यान देते हैं. इनके लिए धन ही धर्म है. धर्म बाद में, पहले धन. और यह जो हुआ है व्यवहार, यह बहुत चिंताजनक है. हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ है. किसी व्यक्ति की बात नहीं होनी चाहिए.
वहीं, चंदौली के सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने मुख्य आरोपी को बचाया जा रहा है. सदन खुलते ही जो प्रमुख मुद्दा होगा, वह ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी की मांग होगी, ताकि करोड़ों करोड़ों हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वाले लोग बच ना सके और उनके जो विश्वास का संकट है, वह दूर हो सके.
'किसी के साथ अन्याय नहीं होगा'
इस मसले पर आरएसएस के सीनियर लीडर इंद्रेश कुमार का भी बयान आया है. उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट के बाद लगातार एक्शन हो रहे हैं और आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है. ऐसे में किसी भी राजनेता को इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की जरूरत नहीं है.
सरकार, राम मंदिर ट्रस्ट और पूरा समाज सजग है कि किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. अयोध्या की महिमा सदैव रही है और हमेशा बनी रहेगी. वह (अखिलेश यादव) अयोध्या की महिमा को पुनर्स्थापित करने वाले कौन होते हैं? राजनेताओं को इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए, बल्कि एक श्रद्धालु के रूप में देखना चाहिए.
'चंपत राय को इस्तीफे देने की सलाह नहीं दी'
इधर, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उनके इस्तीफे देने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी और न ही हमने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी. उन दोनों ने स्वयं नैतिक आधार पर इस्तीफा देने का निर्णय लिया, ताकि जांच की निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का संदेह न रहे. यह संदेश न जाए कि जांच प्रभावित की जा रही है.
यह एक साहसिक और नैतिक निर्णय है, जिसका हम स्वागत करते हैं. अतीत में कई नेताओं पर गंभीर आरोप लगे- गिरफ्तारियां हुईं, भ्रष्टाचार के आरोप लगे, यहां तक कि नकदी और कमीशन से जुड़े घोटालों के मामले भी सामने आए... फिर भी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया. इस मामले में कहीं भी संदेह ना रहे, इसलिए चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिया है.
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