अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन जैसे देशों में बसना लंबे समय से लाखों भारतीयों का सपना रहा है. बेहतर सैलरी, करियर और लाइफस्टाइल की तलाश में लोग सालों तक विदेश में जिंदगी बनाने में जुटे रहते हैं. लेकिन अब सोशल मीडिया पर उन भारतीयों की कहानियां भी तेजी से चर्चा में आ रही हैं, जो विदेश में सालों रहने के बाद भारत लौटने का फैसला कर रहे हैं.
किसी के लिए भारत की मिट्टी की याद. किसी के लिए ये वजह उनके बूढ़े होते माता-पिता हैं, जिनका उनको ख्याल रखना है. किसी के लिए बच्चों का भारतीय माहौल में बड़ा होना और किसी के लिए परिवार व करियर के बीच बेहतर संतुलन. अमेरिका में 13 साल रहने के बाद भारत लौटी पंखुड़ी की कहानी भी इसी बदलती सोच से जुड़ी है. आइये जानते हैं उनकी कहानी.
पंखुड़ी और उनका परिवार 2023 में अमेरिका से वापस भारत आ गया. सोशल मीडिया पर उन्होंने बताया कि आखिर सालों तक वहां जिंदगी बनाने के बाद उन्हें भारत लौटने का फैसला क्यों लेना पड़ा.पंखुड़ी के लिए एक वजह सांस्कृतिक जुड़ाव भी था. उन्होंने बताया कि अमेरिका में कई बार उन्हें अपना नाम समझाना पड़ता था या अपनी पृष्ठभूमि के बारे में लोगों को बताना पड़ता था.
धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि ऐसी जगह रहना कितना अलग अनुभव होता है, जहां लोग आपके नाम, संस्कृति और संदर्भों को बिना ज्यादा समझाए ही समझ लेते हैं.
बूढ़े होते माता-पिता की चिंता
भारत लौटने के फैसले में परिवार भी एक बड़ी वजह बना. जैसे-जैसे उनके माता-पिता की उम्र बढ़ती गई, उन्हें यह सवाल परेशान करने लगा कि आखिर वे अपने माता-पिता के साथ कितना समय सिर्फ वीडियो कॉल और फेसटाइम पर बिताना चाहती हैं.दूर से बात करना और पास रहकर समय बिताना, दोनों में फर्क है. यही एहसास उनके लिए भारत लौटने की बड़ी वजहों में शामिल हो गया.
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क्या वीजा का था मसला
उन्होंने साफ किया कि वे वीजा की समस्या की वजह से अमेरिका नहीं छोड़ रहे थे. हालांकि वीजा एक समस्या नहीं, लेकिन दबाव था, जो हमेशा रहता ही है.वीजा अपॉइंटमेंट, इमिग्रेशन नियम और भविष्य को लेकर होने वाली अनिश्चितता उनकी जिंदगी का हिस्सा जरूर थी.समय के साथ यह भी उन चीजों में शामिल हो गया, जिन पर परिवार ने अपने भविष्य का फैसला करते वक्त विचार किया.
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बच्चों को कैसी जिंदगी देना चाहते थे?
पंखुड़ी और उनके पति ने अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी सोचना शुरू किया. वे इस बात पर विचार करने लगे कि बच्चों को किस तरह का बचपन मिले, परिवार के साथ उनका रिश्ता कैसा हो और वे किस माहौल में बड़े हों.यही सवाल धीरे-धीरे उनके लिए बेहद अहम होता गया.
सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक काम
अमेरिका में उनकी जिंदगी सिर्फ बेहतर सुविधाओं वाली नहीं थी. दोनों का काम का शेड्यूल काफी व्यस्त था. पंखुड़ी के मुताबिक, वह और उनके पति रोज सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक काम करते थे.इसके साथ ही घर और बच्चों की जिम्मेदारियां भी थीं. भारत में घरेलू मदद मिलने की सुविधा ने भी उनके लिए परिवार और काम के बीच संतुलन बनाने की संभावना को अलग तरीके से देखने पर मजबूर किया.
'25 साल की उम्र वाली प्राथमिकताएं बदल गईं'
पंखुड़ी ने कहा कि 25 साल की उम्र में जिंदगी को लेकर जो प्राथमिकताएं थीं, वे समय के साथ बदल गईं.कई बार इंसान सालों तक एक खास तरह की जिंदगी बनाने में लगा रहता है. लेकिन एक समय बाद उसे महसूस होता है कि शायद अब उसकी जरूरतें और इच्छाएं बदल चुकी हैं.उनके लिए अमेरिका छोड़ने का फैसला भी इसी बदलाव से जुड़ा था.
भारत लौटना आसान नहीं था
हालांकि, भारत लौटने का फैसला लेने का मतलब यह नहीं था कि सारी मुश्किलें खत्म हो गईं. 13 साल बाद वापस आने के बाद परिवार को फिर से अपनी जिंदगी बनानी पड़ी.पंखुड़ी ने कहा कि एक देश छोड़कर दूसरे देश में जाना एक बड़ा फैसला होता है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद बिल्कुल नई जिंदगी बनाना एक अलग तरह की चुनौती है.
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