शादी नहीं करनी थी तो मंगेतर की हत्या क्यों? साइकोलॉजिस्ट ने बताया दिमाग में क्या चलता है

पुणे के कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत के मामले में मंगेतर सिया गोयल की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर शादी नहीं करनी थी, तो रिश्ता खत्म क्यों नहीं किया? इस सवाल पर मनोचिकित्सकों और अपराध विज्ञान की रिसर्च अलग-अलग पहलुओं से जवाब तलाशने की कोशिश करती है.

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केतन विशाल अग्रवाल (बाएं), उनकी मंगेतर सिया गोयल (बीच में) और सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी (Photo;ITG) केतन विशाल अग्रवाल (बाएं), उनकी मंगेतर सिया गोयल (बीच में) और सिया के कथित प्रेमी चेतन चौधरी (Photo;ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:46 AM IST

पुणे के 26 साल के कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत को पहले ट्रैकिंग हादसा माना गया था. लेकिन पुलिस जांच में मामला कथित हत्या में बदल गया. पुलिस का आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी ने मिलकर उन्हें लोनावला के लोहागढ़ किले से करीब 400 फीट गहरी खाई में धक्का दिया. दोनों आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं. मामले की जांच जारी है और अंतिम फैसला अदालत करेगी.

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इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा सवाल यही है.अगर शादी नहीं करनी थी, तो रिश्ता खत्म क्यों नहीं किया? हत्या जैसा कदम क्यों उठाया? इसी सवाल को समझने के लिए मनोचिकित्सकों और अपराध विज्ञान से जुड़ी रिसर्च पर नजर डालते हैं.

'प्यार का जुनून और पारिवारिक दबाव कई बार गलत फैसले तक पहुंचा देता है'

साइकोलॉजिस्ट डॉ. बिंदा सिंह का कहना है कि ऐसे मामलों को सिर्फ अपराध के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसके पीछे कई मानसिक और सामाजिक वजहें भी हो सकती हैं.

उनके मुताबिक, अगर किसी लड़की को परिवार में अपनी बात कहने की आजादी न मिले, उसकी भावनाओं को समझा न जाए और वह किसी दूसरे रिश्ते में भावनात्मक रूप से जुड़ चुकी हो, तो उसके अंदर लंबे समय तक घुटन और दबाव बना रह सकता है.

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डॉ. सिंह कहती हैं कि कई बार प्यार धीरे-धीरे जुनून (ऑब्सेशन) बन जाता है. ऐसे में इंसान को लगता है कि उसके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा. वह सही-गलत का फर्क समझने के बजाय जल्दबाजी में गलत फैसला ले सकता है.

यह भी पढ़ें: आखिर क्या गुनाह था राजा और केतन का? सोनम के बाद सिया केस से छिड़ी बहस

उनका यह भी कहना है कि सोशल मीडिया और आभासी दुनिया कई बार लोगों को असली जिंदगी से दूर कर देती है. इंसान अपनी बनाई हुई दुनिया में इतना खो जाता है कि उसे हकीकत और कल्पना के बीच का फर्क साफ नजर नहीं आता.

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी भी आरोपी की मानसिक स्थिति के बारे में बिना पूरी जांच के कोई पक्का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.

ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च क्या कहती है?

ऐसे मामलों को समझने के लिए Australian Institute of Criminology (AIC) ने 2020 में महिला द्वारा अपने साथी की हत्या (Intimate Partner Homicide) पर एक बड़ी रिसर्च की थी.यह रिसर्च 2004 से 2014 के बीच ऑस्ट्रेलिया में दर्ज 115 महिला आरोपियों के मामलों पर आधारित थी.

रिसर्च में पाया गया कि जिन मामलों की पूरी जानकारी उपलब्ध थी, उनमें करीब 48 प्रतिशत मामलों में हत्या पहले से प्लान की गई थी. यानी यह अचानक गुस्से में नहीं हुई, बल्कि पहले से उसकी तैयारी की गई थी. कुछ मामलों में पीड़ित पर सोते समय हमला किया गया, जबकि कुछ मामलों में महिला ने अपने प्रेमी या किसी दूसरे व्यक्ति की मदद ली.

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लेकिन इस रिसर्च की एक और अहम बात भी है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि कई मामलों में महिलाओं ने लंबे समय तक घरेलू हिंसा, मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना झेली थी. कुछ मामलों में आत्मरक्षा का पहलू भी सामने आया. इसलिए सभी मामलों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा.

महिला आरोपियों के तीन तरह के मामले

AIC की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला आरोपियों के मामलों को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बांटा गया-

वे महिलाएं जिन्होंने लंबे समय तक घरेलू हिंसा या प्रताड़ना झेली.
वे महिलाएं जिन्होंने रिश्ते में झगड़े, ईर्ष्या या ब्रेकअप जैसी स्थिति में अपराध किया.
वे महिलाएं जिन्होंने आर्थिक कारणों, नए प्रेम संबंध या दूसरे निजी कारणों से पहले से योजना बनाकर हत्या की.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महिला और पुरुष आरोपियों के अपराध करने का तरीका कई बार अलग होता है. महिला आरोपियों के मामलों में किसी तीसरे व्यक्ति की मदद लेना, जहर देना, सोते समय हमला करना या पहले से योजना बनाना जैसे पैटर्न अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिले.

क्या इस रिसर्च से सिया गोयल केस को समझा जा सकता है?

विशेषज्ञों का जवाब है-सीधे तौर पर नहीं.

AIC की यह रिसर्च ऑस्ट्रेलिया के पुराने मामलों पर आधारित है. इसे किसी एक भारतीय मामले का सबूत नहीं माना जा सकता. सिया गोयल केस में क्या हुआ, इसका फैसला पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में पेश होने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा.

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हर मामला अलग होता है

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक चर्चित घटना के आधार पर पूरे समाज, सभी महिलाओं, सभी पुरुषों या सभी अरेंज मैरिज के बारे में राय बना लेना सही नहीं है.

हर अपराध के पीछे अलग परिस्थितियां, पारिवारिक माहौल, मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत फैसले होते हैं. इसलिए ऐसे मामलों को समझने के लिए मनोविज्ञान, अपराध विज्ञान और कानून-तीनों को साथ लेकर देखना जरूरी है.

फिलहाल केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच जारी है. अंतिम सच अदालत के फैसले के बाद ही सामने आएगा. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में संवाद, मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक दबाव और शादी से जुड़े फैसलों पर गंभीर बहस जरूर छेड़ दी है

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