इन दो मंदिरों ने 11 अगस्त को क्यों मनाया स्वतंत्रता दिवस? आखिर क्या है इनकी कहानी

पूरा देश कल यानी 15 अगस्त को आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा है. वहीं मध्य प्रदेश के दो मंदिरों ने चार दिन पहले यानी 11 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस मना लिया. चलिए जानते हैं आखिर चार दिन पहले आजादी का जश्न मनाने के पीछे वजह क्या है.

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मध्य प्रदेश के इन दो मंदिरों में समय से पहले स्वतंत्रता दिवस मना लिया गया मध्य प्रदेश के इन दो मंदिरों में समय से पहले स्वतंत्रता दिवस मना लिया गया

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:46 PM IST

देशभर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के दो प्रसिद्ध मंदिरों में चार दिन पहले ही आजादी का जश्न मनाया गया. मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर और उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में 11 अगस्त को विशेष पूजा-पाठ, तिरंगा यात्रा और ध्वजारोहण हुआ.

अब सवाल उठता है कि जब भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, तो इन मंदिरों में 11 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया गया? इसके पीछे इन मंदिरों की खास परंपरा और हिंदू पंचांग की तारीख जुड़ी हुई है.

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पंचांग की तारीख पर मनाते हैं आजादी का दिन
एक एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर और उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में स्वतंत्रता दिवस मनाने की तारीख अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय हिंदू पंचांग के आधार पर तय की जाती है.

मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, 15 अगस्त 1947 को जब भारत ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था, उस दिन हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण चतुर्दशी थी. यही वजह है कि दोनों मंदिर हर साल श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं. इस साल यह तिथि 11 अगस्त को पड़ी. इसलिए इन दोनों मंदिरों में चार दिन पहले ही आजादी का उत्सव मनाया गया.

मंदसौर में शिवलिंग का हुआ विशेष अभिषेक
मंदसौर में शिवना नदी के किनारे स्थित प्राचीन पशुपतिनाथ मंदिर में मंगलवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर खास धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में भगवान पशुपतिनाथ के आठ मुख वाले शिवलिंग को विशेष रूप से सजाया गया.

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ज्योतिष एवं कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष उमेश जोशी के मुताबिक, कार्यक्रम में करीब 250 श्रद्धालु शामिल हुए. इस दौरान वैदिक मंत्रों के बीच शिवलिंग का जल और दूर्वा मिले पानी से अभिषेक किया गया. पूजा के दौरान भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की कामना भी की गई. कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद बांटा गया.

1985 से चली आ रही है यह परंपरा
पशुपतिनाथ मंदिर में पंचांग की तिथि के आधार पर स्वतंत्रता दिवस मनाने की परंपरा कोई नई नहीं है. मंदिर से जुड़े लोगों के मुताबिक, यहां 1985 से श्रावण कृष्ण चतुर्दशी के दिन स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है.

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव का अभिषेक विशेष महत्व रखता है. मंदिर के पुजारियों का कहना है कि दूर्वा मिले पानी से भगवान शिव का अभिषेक करने से भक्तों की परेशानियां दूर होने की मान्यता है.

उज्जैन के बड़े गणेश मंदिर में भी दिखा देशभक्ति का रंग
उज्जैन के प्रसिद्ध बड़े गणेश मंदिर में भी 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस धार्मिक परंपराओं और देशभक्ति के साथ मनाया गया. यहां भी राष्ट्रीय पर्व की तारीख हिंदू पंचांग के आधार पर तय करने की दशकों पुरानी परंपरा बताई जाती है.

मंदिर से जुड़े पुजारी अक्षत व्यास के मुताबिक, यहां राष्ट्रीय पर्वों को ग्रेगोरियन कैलेंडर यानी दुनिया में प्रचलित सामान्य अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों के बजाय हिंदू पंचांग की तिथियों के अनुसार मनाया जाता है. इस मंदिर में भगवान गणेश को 'राष्ट्र देव' के रूप में भी पूजा जाता है.

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तिरंगा यात्रा निकली, शिखर पर फहराया गया झंडा
11 अगस्त को बड़े गणेश मंदिर में आजादी के जश्न के दौरान तिरंगा यात्रा निकाली गई. ढोल-नगाड़ों के साथ निकली इस यात्रा में लोगों ने देशभक्ति के नारे लगाए. मंदिर में भगवान गणेश को राष्ट्रीय ध्वज अर्पित करने के बाद विशेष महाआरती की गई. इसके बाद मंदिर के मुख्य शिखर पर तिरंगा फहराया गया.

इस तरह एक तरफ देशभर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी है, तो मध्य प्रदेश के इन दोनों मंदिरों में हिंदू पंचांग की उस तिथि को आजादी का पर्व मनाया गया, जिस दिन 1947 में भारत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता हासिल की थी.

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