किसी हाई-पेइंग टेक जॉब को छोड़ना आसान फैसला नहीं होता. खासकर तब, जब सालाना सैलरी करोड़ों में हो और कंपनी के शेयर अलग से मिल रहे हों. लेकिन 40 साल के जेसन शेन के लिए अच्छी कमाई और वित्तीय सुरक्षा भी आखिरकार काफी नहीं रही. मेटा में करीब तीन साल काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और स्टार्टअप फाउंडर्स को कोचिंग देने का अपना बिजनेस शुरू कर दिया.
बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, जेसन शेन ने जून 2023 में मेटा छोड़ा. उस वक्त सैलरी और बोनस मिलाकर उनका सालाना कैश कंपेनसेशन करीब 2.5 लाख डॉलर, यानी इंडियन करेंसी में लगभग 2 करोड़ रुपये था. वह जॉब के साथ-साथ पहले से ही कुछ फाउंडर्स को कोचिंग दे रहे थे. बाद में उन्होंने इसी काम को फुल-टाइम करियर बनाने का फैसला किया और 2024 में रिफैक्टर लैब्स पर पूरी तरह फोकस करना शुरू कर दिया.
आखिर 2 करोड़ की जॉब क्यों छोड़ी?
जेसन का टेक करियर काफी शानदार रहा है. उन्होंने करीब दो साल एट्सी में काम किया, फिर अपनी टेक कंपनी शुरू की, जिसे बाद में फेसबुक ने खरीद लिया. इसके बाद वह मेटा में प्रोडक्ट लीडर के तौर पर शुरूआत की.
उन्हें अपने साथियों के साथ काम करना पसंद था, लेकिन धीरे-धीरे जॉब का माहौल उनके लिए काफी स्ट्रेस भरा होता गया. दिनभर मीटिंग्स, डॉक्यूमेंट रिव्यू, कंपनी के भीतर बदलाव, रीऑर्गनाइजेशन और लगातार बदलती जिम्मेदारियों के बीच उन्हें लगने लगा कि वह अगले 20 साल तक इसी तरह काम नहीं कर सकते.जेसन ने कहा कि पैसा जरूर अच्छा था, लेकिन वह खुद को लंबे वक्त तक उसी माहौल में काम करते हुए नहीं देख पा रहे थे.
हफ्ते में 20 घंटे काम, 12 महीने में 3 करोड़ का रेवेन्यू
मेटा छोड़ने के बाद जेसन ने अपना बिजनेस खड़ा करने के लिए करीब 1.5 लाख डॉलर अलग रखे. यह रकम उन्होंने अपनी कंपनी को शुरू करने और शुरुआती दौर में खुद को संभालने के लिए रखी थी.
अब उनका रिफैक्टर लैब्स नाम का बिजनेस स्टार्टअप फाउंडर्स और सीनियर प्रोफेशनल्स को कोचिंग देता है. कुछ क्लाइंट्स मासिक रिटेनर पर जुड़े रहते हैं, जबकि को-फाउंडर के बीच विवाद सुलझाने वाले क्लाइंट्स के लिए तीन महीने के पैकेज होते हैं.
जेसन के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में उनकी कंपनी ने 3.69 लाख डॉलर यानी करीब 3 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया. हालांकि, यह उनका शुद्ध मुनाफा नहीं है. इस रकम में सॉफ्टवेयर, मार्केटिंग, क्रेडिट कार्ड फीस, को-वर्किंग स्पेस और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे खर्च शामिल हैं.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि जेसन अब हफ्ते में करीब 20 घंटे ही काम करते हैं. उनका ज्यादातर काम जूम कॉल्स पर होता है और प्रशासनिक काम संभालने के लिए वह एआई टूल्स का इस्तेमाल करते हैं.
शाम का वक्त बेटी के नाम
नौकरी छोड़ने के बाद जेसन की जिंदगी सिर्फ पैसों के मामले में नहीं बदली, बल्कि उन्हें अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए भी ज्यादा समय मिलने लगा.वह शाम को अपनी बेटी को पार्क ले जाते हैं या उसके साथ स्ट्रोलर रन पर निकलते हैं. इसके अलावा वह फिटनेस और दूसरे क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स पर भी काम करते हैं. जेसन इन दिनों 'डीप एम्बिशन' नाम की किताब भी लिख रहे हैं, जो महत्वाकांक्षा और अपनी शर्तों पर बेहतर जिंदगी बनाने के विचार पर आधारित है.
मेटा में रहते तो और करोड़ों कमा सकते थे
जेसन मानते हैं कि अगर वह मेटा में बने रहते तो कंपनी के शेयरों और सैलरी से आने वाले सालों में और लाखों डॉलर कमा सकते थे. लेकिन उनके मुताबिक, उस पैसे के लिए उन्हें कई साल तक उसी तनावपूर्ण रफ्तार से काम करना पड़ता.अब उनका लक्ष्य अपनी पुरानी बिग टेक वाली कमाई को पार करना है, लेकिन इस बार वह अपनी जिंदगी का लचीलापन खोना नहीं चाहते.
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