क्या किसी एक देश का पासपोर्ट बदल जाने पर दुनिया बदल जाती है? ऐसा कहना है अरुण चंद्रन का. ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के ऑथर अरुण चंद्रन ने इंडियन और ऑस्ट्रेलियन पासपोर्ट के साथ यात्रा के अपने अनुभव शेयर किए हैं. उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है.
इंस्टा पर शेयर किए एक वीडियो में वे 2019 में ऑस्ट्रेलियन नागरिक बनने से पहले वह इंडियन पासपोर्ट पर करीब 39 देशों की यात्रा कर चुके थे. लेकिन विदेश यात्रा के लिए वीजा अप्लाई करने का अनुभव उनके लिए काफी अलग था. खासकर यूरोप के लिए वीजा लेते समय उन्हें ढेर सारे डॉक्यूमेंट जमा करने पड़ते थे.
इंडियन पासपोर्ट पर मिला सिर्फ 12 दिन का वीजा
चंद्रन ने बताया कि जब उन्होंने मेलबर्न में रहते हुए पहली बार शेंगेन वीजा के लिए अप्लाई किया, तो उन्हें सिर्फ 12 दिनों का वीजा मिला. उनका कहना है कि मेलबर्न से यूरोप पहुंचने में करीब एक दिन और वापस आने में एक दिन लग जाता था. ऐसे में करीब 10 दिन ही यूरोप में बिताने के लिए बचे.
उन्होंने बताया कि वीजा प्रक्रिया में बैंक स्टेटमेंट, सैलरी स्लिप, पेड इटिनरेरी, इंश्योरेंस और घर वापस लौटने की वजह बताने वाला लेटर जैसे कई डॉक्यूमेंट देने पड़ते थे.
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ऑस्ट्रेलियन पासपोर्ट मिलते ही बदल गया अनुभव
'पासपोर्ट प्रिविलेज' का आसान मतलब है- पासपोर्ट की वजह से मिलने वाली यात्रा की आसानी और सुविधा. यानी कुछ देशों के पासपोर्ट रखने वालों को दूसरे देशों में जाने के लिए कम वीजा झंझट, कम कागजी कार्रवाई या बिना पहले से वीजा के एंट्री मिल जाती है. वहीं कुछ देशों के नागरिकों को ज्यादा दस्तावेज और लंबी वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
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2019 में ऑस्ट्रेलियन नागरिक बनने के बाद जब चंद्रन दोबारा इटली गए तो अनुभव बिल्कुल अलग था. उन्होंने बताया कि इस बार उन्हें पहले से वीजा लेने की जरूरत नहीं पड़ी और 90 दिनों तक वीजा-फ्री एंट्री मिली.
इटली के एयरपोर्ट पर उन्हें न तो किसी लंबे इंटरव्यू से गुजरना पड़ा और न ही डाक्यूमेंट के प्रोसेस से. उन्होंने बताया कि वह सीधे ई-गेट से होकर बैगेज कलेक्शन तक पहुंच गए.
क्या है 'पासपोर्ट प्रिविलेज'
चंद्रन ने इसी अंतर को 'पासपोर्ट प्रिविलेज' बताया. 'पासपोर्ट प्रिविलेज' का आसान मतलब है- पासपोर्ट की वजह से मिलने वाली यात्रा की आसानी और सुविधा. यानी कुछ देशों के पासपोर्ट रखने वालों को दूसरे देशों में जाने के लिए कम वीजा झंझट, कम कागजी कार्रवाई या बिना पहले से वीजा के एंट्री मिल जाती है. वहीं कुछ देशों के नागरिकों को ज्यादा दस्तावेज और लंबी वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
उनका कहना है कि ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के पासपोर्ट रखने वाले कई लोगों को शायद अंदाजा भी नहीं होता कि कमजोर वीजा एक्सेस वाले देशों के नागरिकों को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
'इंसान वही था, सिर्फ पासपोर्ट बदल गया'
चंद्रन ने अपने अनुभव के जरिए 'इक्वैलिटी ऑफ मूवमेंट' यानी दुनिया में कहीं आने-जाने की असमानता का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर आर्थिक असमानता की बात करते हैं, लेकिन यात्रा की आजादी में मौजूद असमानता पर कम चर्चा होती है.उनके मुताबिक, इंडियन पासपोर्ट से यात्रा करते समय जिस तरह के डॉक्यूमेंट और वीजा प्रक्रिया से गुजरना पड़ा, ऑस्ट्रेलियन पासपोर्ट मिलने के बाद वही यात्रा काफी आसान हो गई.
उनके वीडियो पर लोगों ने क्या कहा
अरुण चंद्रन की बात पर सोशल मीडिया यूजर्स की राय भी बंटी हुई नजर आई. कुछ लोगों ने उनके 'पासपोर्ट प्रिविलेज' वाले अनुभव से सहमति जताई. एक यूजर ने लिखा कि उसने इंडियन पासपोर्ट पर 58 देशों की यात्रा की है और उसे कभी वीजा की समस्या नहीं हुई. वहीं दूसरे यूजर ने बताया कि अमेरिका, कनाडा और जापान के वीजा के लिए उसे काफी ज्यादा डॉक्यूमेंट तैयार करने पड़े थे और यह प्रक्रिया बेहद थकाने वाली थी.
कुछ यूजर्स ने अरुण की बात को बिल्कुल सही बताया. एक कमेंट में लिखा गया, 'पासपोर्ट प्रिविलेज निश्चित तौर पर एक चीज है.' वहीं एक अन्य यूजर ने कहा कि मजबूत पासपोर्ट के साथ यात्रा करने पर कम सवालों और कम कागजी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है.
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