एक पति का अपनी पत्नी के लिए प्यार जताने का तरीका सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. शख्स ने नई कार खरीदने के बाद पत्नी को गोद में उठाया और कार के बोनट पर उसके आलता लगे पैरों के निशान बनवाए. कुछ लोगों को पति का यह अंदाज बेहद प्यारा लगा, तो कुछ ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि आखिर कार खरीदने में पत्नी का कितना पैसा लगा है. देखते ही देखते यह मामला प्यार, पैसे और महिलाओं के सम्मान को लेकर बहस में बदल गया. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसे लाखों बार देखा गया. वीडियो में एक पति अपनी पत्नी को गोद में उठाकर नई कार के बोनट तक ले जाता है. इसके बाद पत्नी के पैरों पर लगे लाल रंग यानी आलता से कार पर पैरों के निशान बनवाता है.
भारत में कई जगहों पर शादी और दूसरे शुभ मौकों पर महिलाओं के पैरों में आलता लगाया जाता है. घर में नई दुल्हन के प्रवेश के समय उसके लाल पैरों के निशान बनाना भी एक पुरानी परंपरा है. इसे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आने का प्रतीक माना जाता है. इस मामले में पति ने इसी तरह की परंपरा को अपनी नई कार के साथ जोड़ा. कुछ लोगों ने इसे पत्नी को खास महसूस कराने और नई शुरुआत की खुशी साथ मनाने का खूबसूरत तरीका बताया. हालांकि, सोशल मीडिया पर हर किसी को यह अंदाज पसंद नहीं आया.
'क्या पत्नी कार की ईएमआई भरती है?'
वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने पति के इस कदम की आलोचना की. किसी ने इसे पसंद नहीं किया, तो किसी ने सवाल उठाया कि कार खरीदने में पत्नी का आर्थिक योगदान कितना है.इसी बीच एक कमेंट ने लोगों का ध्यान खींचा. इसमें पूछा गया कि क्या पत्नी कार की ईएमआई यानी हर महीने बैंक को दी जाने वाली किस्त भरती है? इसके बाद बहस का मुद्दा बदल गया. लोग इस बात पर चर्चा करने लगे कि क्या किसी महिला को अपने पति से प्यार और सम्मान पाने के लिए कार खरीदने या उसकी किस्त चुकाने में पैसे लगाने जरूरी हैं.
क्या रिश्ते में प्यार भी पैसों से तौला जाएगा?
इस वीडियो को लेकर सबसे बड़ी बहस इसी सवाल पर हुई. कई लोगों का मानना था कि पति-पत्नी के रिश्ते में प्यार और सम्मान को केवल पैसों से नहीं मापना चाहिए. हर परिवार में जिम्मेदारियां बांटने का तरीका अलग होता है. कोई घर चलाने के लिए पैसे कमाता है, तो कोई घर की देखभाल करता है, परिवार के सदस्यों की जरूरतों का ध्यान रखता है और मुश्किल समय में इमोशनल सपोर्ट देता है. इसलिए किसी व्यक्ति का योगदान सिर्फ उसकी कमाई या बैंक खाते से नहीं आंका जा सकता. अगर कोई पत्नी कार की ईएमआई नहीं भरती, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह अपने परिवार के लिए कुछ नहीं करती.
हालांकि, पति-पत्नी के बीच पैसों और खर्चों को लेकर आपसी सहमति होना भी जरूरी है. लेकिन किसी रिश्ते में सम्मान को केवल इस बात से जोड़ देना कि किसने कितने पैसे खर्च किए, अपने आप में एक अलग सोच को दिखाता है.
लोगों ने परंपरा का भी दिया हवाला
कुछ लोगों ने पति के इस कदम का समर्थन करते हुए भारतीय परंपराओं का जिक्र किया. उनके मुताबिक, घर में नई दुल्हन के पैरों के निशान को शुभ माना जाता है. लाल पैरों के निशान को मां लक्ष्मी और सुख-समृद्धि से भी जोड़ा जाता है. ऐसे में नई कार पर पत्नी के पैरों के निशान बनवाना पति के लिए खुशी मनाने और नई शुरुआत को खास बनाने का एक तरीका हो सकता है. इन लोगों का कहना था कि पति-पत्नी के बीच प्यार जताने के ऐसे निजी पलों का मजाक उड़ाना सही नहीं है. वहीं, कुछ लोगों ने इस बात पर भी सवाल उठाए कि किसी की निजी खुशी को सोशल मीडिया पर देखकर उसके रिश्ते और आर्थिक स्थिति के बारे में फैसला सुनाना कितना सही है.
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ गई बहस?
दरअसल, यह मामला सिर्फ एक नई कार या पति-पत्नी के बीच प्यार जताने तक सीमित नहीं रहा. इसने समाज में महिलाओं की भूमिका और रिश्तों में पैसों की अहमियत को लेकर चर्चा शुरू कर दी. एक तरफ वे लोग हैं, जिन्हें पति का अपनी पत्नी को खास महसूस कराने का तरीका पसंद आया. दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं, जो हर चीज को आर्थिक योगदान के नजरिए से देखते हैं. लेकिन इस वीडियो से यह पता नहीं चलता कि कार खरीदने में पति या पत्नी ने कितने पैसे लगाए या उनके घर में खर्चों का बंटवारा कैसे होता है. ऐसे में सिर्फ एक वीडियो के आधार पर उनके रिश्ते के बारे में कोई नतीजा निकालना सही नहीं होगा.
aajtak.in